गणिनी आर्यिका सुप्रकाशमति माताजी का हुआ नगर में हुआ मंगल प्रवेश जैन धर्म व्यक्ति की नहीं गुणों की पूजा करता है सुप्रकाशमति माताजी
रामगंजमंडी
परम पूजनीय गणिनी आर्यिका 105 सुप्रकाश मति माताजी का रामगंज मंडी नगर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ पूज्य माताजी का नगर की सीमा पर स्थित कमल फिलिंग स्टेशन पर समाज जनों ने भव्य आगवानी की सभी ने गुरु मां की आरती कर पद प्रक्षालन कर उनकी आगवानी की गुरु मां संघ को नगर के प्रमुख मार्गो से होते हुए बैंड बाजों के साथ श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर लाया गया जगह-जगह गुरु मां का पद प्रक्षालन कर मंगल आरती की गई। इसी क्रम में भगवान गिरिराज की हो रही परिक्रमा में चल रहे बंधुओ ने भी गुरु मां के दर्शन कर उनके मंगल आगवानी की उस समय रामगंज मंडी नगर का माहौल धर्मनिरपेक्षता का का एक पर्याय बन गया।
अगवानी के मार्ग में गुरु मां संघ ने महावीर दिगंबर जैन मंदिर के दर्शन किये मंदिर समिति ने गुरु मां की भव्य अगवानी की और आरती की। शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर पहुंचने पर प्रवेश मार्ग पर गुरु मां का भव्य पदप्रक्षालन मंगल आरती कर उनकी
अगवानीकी। इसके बाद गुरु मां ने भगवान शांति नाथ भगवान के दर्शन किए इसके बाद धर्म सभा हुई धर्म सभा का संचालन महामंत्री राजकुमार गंगवाल ने किया सकल दिगंबर जैन समाज की ओर से गुरु मां को शीतकाल प्रवास हेतु निवेदन किया। प्रवचन सभा के शुभारंभ में मंगलाचरण श्रीमती अनिता जैन ने किया।
इस अवसर पर गुरु मां ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि जैन धर्म व्यक्ति की नहीं गुणों को पूजा करता है। जैन धर्म व्यक्तित्व नहीं गुणात्मक है उन्होंने कहा गुणी जन को देख मन में स्नेह आना चाहिए और उनका आदर करना चाहिए गुणी जनों को देख हृदय में मेरे प्रेम उमड़ आवे इस पंक्ति को कहकर गुरु मां ने सभी को बताया।
उन्होंने कहा कि ज्ञान अगर अधूरा रहता है तो आदमी भटक जाता है। श्रमण संस्कृति के विषय में बोलते हुए उन्होंने कहा कि संतों के कारण ही श्रमण संस्कृति चल रही है और धर्म चल रहा है।
आज अगर श्रमण संस्कृति जीवंत है तो गुरु और संतों के कारण
है।
संयम संयोग से जीवन चल रहा है और हमारी संस्कृति जीवंत तो रही है। श्रावकों को षट्कर्मों का पालन करना चाहिए और साधुओं को सदाचरण का पालन करना चाहिए। साधु उपदेशक होता है। श्रावकों को सद मार्ग पर लगाना आवश्यक है और यह कार्य साधु करता है। जो श्रावक षट्कर्मों का पालन नहीं करता वह श्रावक नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि पुण्य कर्मों से वंचित मत रहो। राग द्वेष संसार में भटकने का कारण है। माताजी ने रावण का उदाहरण देते हुए कहा कि रावण सीता के कारण नरक नहीं गया रावण अहंकार के कारण गया। अहंकार नरक निगोद में ले जाने का कारण है। साधु संतों का संयोग पुण्य से मिलता है संत रमता जोगी बहता पानी है। दोपहर की बेला में माता जी का मंगल विहार संधारा की ओर हुआ
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
