आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने सन्मति भवन में केश लोचन किया ।

धर्म

वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज ने किया केशलोचन।
पारसोला।
परम पूज्य वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर महाराज का प्रवास धर्म नगरी पारसोला में चल रहा है जहां धर्म प्रभावना हो रही है। रविवार की प्रातः बेला में पूज्य आचार्य श्री ने अपने हाथों से केशो का लोचन किया केशलोच एक साधना है एक तपस्या है स्वयं के हाथों से अपने बालों को घास फूस की तरह उखाड़ना सहज नहीं होता यह एक महान तपस्वी एवं दिगंबर संत ही कर सकता है। मुनि स्वावलंबी होते हैं और उनकी चर्या सिंह के समान होती है, इसलिए बाल हटाने के लिए किसी का सहारा नहीं लेते.केशलोचन परिषह सहन करने के लिए भी ज़रूरी होता है उस दिन मुनि निराहार रहकर उपवास रखते हैं। केश लोचन के बारे में संघ के मुनि श्री हितेंद्र सागर ने चर्चा में बताया कि प्रत्येक दिगंबर साधु को 2 माह से 4 माह की अवधि के भीतर के केशलोचन करना अनिवार्य है केशलोच दिगंबर साधु का मूल गुण है । केशलोचन के माध्यम से शरीर से राग और मोह दूर होता है केश लोचन की प्रक्रिया में मुनि श्री ने बताया कि केश्लोचन करते समय केवल राख का उपयोग किया जाता है जैन धर्म अहिंसा प्रधान धर्म है बालों का लोचन अगर नहीं किए जाएं तो उसमें छोटे-छोटे जीवो की उत्पत्ति होने की संभावना होती है जैन साधु अहिंसा धर्म के महाव्रती होते हैं। बाल हाथों से इसलिए उखाड़े जाते हैं कि बालों को कटिंग करने के लिए सेविंग कराने के लिए अन्य द्रव्य की आवश्यकता होती है जैन साधु अपरिग्रही होते हैं। इसलिए जैन साधु अपने हाथ से केशलोचन करते हैं बाल सौंदर्य का प्रतीक हैं इससे राग और आकर्षण होता है। केश लोच से शरीर से ममत्व दूर होता है केश लोचन के समय तप,संयम, धैर्य के साथ धर्म की प्रभावना होती है केश लोचन देखकर अनुमोदना करने से पुण्य की प्राप्ति होती है कर्मों की निर्जरा होती है। इस अवसर सभी साधु उपस्थित रहे।इस अवसर पर अनेक महिलाओ ने वैराग्य पूर्ण भजन गा कर केशलोचन की तपस्या की अनुमोदना की।राजस्थान के अनेक नगरों से आचार्य श्री को अपने नगर में आगमन करने हेतु भक्तगण आकर श्रीफल भेंट कर रहे हैंराजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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