ज्ञान कल्याणक और मोक्ष कल्याणक के दिव्य मंचन ने श्रद्धालुओं को किया भाव-विभोर पंचकल्याणक प्रतिष्ठा और त्रयगजरथ महोत्सव में उमड़े श्रद्धालु
मुहारीकलां
खनियांधाना इन दिनों अद्वितीय आध्यात्मिक वातावरण से आलोकित है। नगर में आयोजित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं त्रयगजरथ महोत्सव के चौथे और पांचवें दिवस में भक्ति, श्रद्धा, तप, संयम और ज्ञान का अद्वितीय संगम देखने को मिला। मुनिसंघ की दिव्य उपस्थिति, मंगल ध्वनियों, स्तोत्रों की गूंज और विशाल जनसमूह की आस्था ने संपूर्ण नगर को मानो जीवंत तीर्थ में परिवर्तित कर दिया। महोत्सव का सबसे आकर्षक और भावपूर्ण प्रसंग ज्ञान कल्याणक का दिव्य मंचन रहा। जैसे ही प्रभु के केवल ज्ञान प्राप्ति का दृश्य प्रस्तुत हुआ, पूरा पंडाल जयघोषों, घंटे-घड़ियालों की ध्वनि और भक्तों की भावनाओं से भर उठा।
श्रद्धालुओं ने उस क्षण को ऐसे महसूस किया मानो वे स्वयं उस पावन कालखंड के साक्षी हों, जब तप, त्याग और साधना अपने उच्चतम स्वरूप में परिणत होकर अनंत ज्ञान में बदलते हैं। जैन परंपरा के अनुसार दीर्घ तपश्चर्या के उपरांत प्रभु आहार के लिए निकले। प्रथम आहार अर्पण का सौभाग्य राजा श्रेयांश को प्राप्त हुआ। राजा सोम ने भी भक्तिभाव से सहभागिता निभाई। इक्षुरस से पारणा कराने का दृश्य जैसे ही मंचित हुआ, पंडाल आदिनाथ भगवान की जय और वर्धमान वीर की जय के नारों से गूंज उठा। कई श्रद्धालु भावुक हो उठे और उन्होंने दान, संयम और श्रावक धर्म की महिमा को हृदय से अनुभव किया।
समवशरण की दिव्य रचना देख भावविभोर हुए श्रद्धालु
केवलज्ञान के उपरांत देवों द्वारा समवशरण की दिव्य रचना का मंचन किया गया। चारों दिशाओं से देव, मनुष्य और तिर्यंच प्रभु की वाणी का श्रवण करने पहुंचे। जब समवशरण की यह कल्पना मंच पर साकार हुई श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर निहारते रहे।


मोक्ष कल्याणक ने दिया वैराग्य का संदेश
रविवार को मोक्ष कल्याणक का अत्यंत भावपूर्ण मंचन प्रस्तुत किया गया। प्रभु के सिद्धपद प्राप्त करने का दृश्य श्रद्धालुओं को वैराग्य और मुक्ति मार्ग की ओर प्रवृत्त करता दिखाई दिया। इसके उपरांत त्रयगजरथ की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। सुसज्जित रथों पर विराजित प्रभु की प्रतिमाएं नगर भ्रमण पर निकलीं। बैंड-बाजों, धर्मध्वजाओं और धार्मिक घोषों के साथ निकली यह शोभायात्रा पूरे नगर को भक्तिरस से सराबोर कर गई।


मिठाई भी बांटी गई
महोत्सव समिति द्वारा मिष्ठान वितरण की विशाल व्यवस्था की गई। बाहर से आए श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, चिकित्सा, सुरक्षा यातायात की उत्कृष्ट व्यवस्थाएं की गईं। आयोजकों के अनुसार इन दिनों हजारों श्रद्धालु धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं। पूरे कार्यक्रम को प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया सुयश के निर्देशन में परंपरा और मर्यादा केअनुरूप संपन कराया जा रहा है। मंच संचालन, पूजन-विधान और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में अनुशासन और भक्ति का अद्भुत समन्वय देखने को मिल रहा है। खनियांधाना सचमुच इन दिनों एक जीवंत तीर्थ का रूप ले चुका है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
