पुण्य के उदय से प्रकृति भी फल फुल जाती है सुधासागर जी कटनी
-कुछ कर्म की प्रकृति या ऐसी होती है जो पाप की ओर ले जाती है इस कलिकाल में पापनुबन्धी पुण्य का बहुता होने के कारण लोगों के पास पुण्य तो रहता है लेकिन वह पाप की ओर ही व्यक्ति को ले जाता है उसे हम पुरुषार्थ के माध्यम से पुण्यानुबधी पुण्य में बदल सकते है।
उक्त आशय के उद्गार जिज्ञासा समाधान समारोह मे कटनी से सीधे प्रसारण में मुनि पुंगव सुधासागर महाराज ने व्यक्त किए। मध्य प्रदेश महासभा के संयोजक विजय धुर्रा ने बताया कि मुनि पुगंव श्रीसुधासागर महाराज ससंघ मुनिश्री वीर सागरजी महाराज ससंघ का कुंडलपुर से विहार करते हुए बारह पिच्छिका के साथ कटनी नगर चेतनोदय तीर्थ गौशाला में भव्य मंगल प्रवेश किया मुनि संघ चेतनोदय तीर्थ में विराजमान रहेगा ।
बड़े लोग पहले ही निमित्तयो को देखकर जान लेते हैं मुनिश्री
मुनि पुगंव सुधासागर महाराज ने मुनि श्री वीर सागर महाराज की जिज्ञासा का समाधान करते हुए कहा कि, सन दो हज़ार बारह में रामटेक तीर्थ से आचार्य श्री ने कटनी के लिए विहार करने का आशीर्वाद दिया, तो मैं सोच रहा था कि आचार्य श्री चूना पत्थर के बीच क्या देख रहे हैं,जो कटनी जाने की आज्ञा दी, बड़े लोग क्या देखते हैं ये तो वही जाने कई बार विचार किया, जब यहां आये तो इस भूमि को और आज जो तीर्थ आप देख रहे हैं इसके पहले यहां बहुत धूल खाई जब ये तीर्थ बना है।
शीघ्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा हो चेतनोदय तीर्थ की धवलसागरजी
अपने उद्बोधान मे मुनि श्री धवल सागर जी महाराज ने कहा कि इस तीर्थ भूमि को देखने के पहले हमने आपके दर्शन राजस्थान के आवा तीर्थ में किए थे, उस तीर्थ से कई गुना विशाल चेतनोदय तीर्थ आज आपके साथ देखकर आत्मा गद गद हो गई।मुनि श्री जी चेतनोदय तीर्थ भी आपकी परिकल्पना के अनुसार विकसित हो शीघ्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव हो हम सब की भावना है जिसे हमने आपके सामने रख रहे हैं
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी
