जो लोग धर्म स्थानों आकर अशांति करते है वह पाप कार्यो को करते है उन्हे धोया नहीं जा सकता अजित सागर महाराज

दमोह
विश्व वन्दनीय आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री अजित सागर महाराज की निश्रा मे सिद्धचक्र महामंडल विधान भक्ति भाव के साथ हुआ इसी तारतम्य मे पूज्य मुनि श्री ने गुरुवार को अपने उद्बोधन मे कहा मंदिर शांति के लिए बनाए जाते है वहां पर जाकर हमें शांति प्राप्त करने की भावना हाेनी चाहिए,मुनि श्री ने ध्यान दिलाते हुए व सन्देश देते हुए कहा जो लोग धर्म स्थानों पर आकर के अशांति उत्पन्न करते हैं, अथवा पाप कार्य करते हैं उन्हें धोया नहीं जा सकता,इसका कारण बताते हुए कहा क्योंकि धर्म के स्थान ऐसे पवित्र स्थान होते हैं, जहां पर संसार के क्षेत्रों में किए गए पाप धोए जाते हैं, किंतु धर्म क्षेत्र में किए गए पाप बज्र लेप की तरह हो जाते हैं जिन्हें धोया नहीं जा सकता इसलिए कहता हु धर्म क्षेत्र में कभी भी पाप कार्य नहीं करनी चाहिए, उन्होने मनुष्य पर्याय के विषय मे बोलते हुए कहा हमें यह मनुष्य पर्याय बड़े सौभाग्य से प्राप्त हुई है,इसकी दुर्लभता को समझे जिसके जीवन मे तेज कषाय का भाव होता है,पाप कार्यो मे रहते है उन्हे नरक आयु मिलती है,हमे धर्म कार्यो मे कभी भी बाधक नहीं बनना चाहिए जो भी अच्छे कार्यो को करते है, उनको देव आयु को प्राप्त हो जाती है मायाचारी व्यक्ति को पशु गति ही प्राप्त होती है, अंत मे कहा अपने भावो को संभाल अपने जीवन को सार्थक करना चाहिए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी
