अध्यात्म की दृष्टि से ज्ञान ध्यान तपस्या में लीन रहना परोपकार है – आचार्य इन्द्रनन्दी महाराज आचार्य इन्द्रनन्दी महाराज का गांव बनस्थली से फागी के लिए मंगल विहार हुआ
निवाई –
आचार्य इन्द्रनन्दी महाराज ने जैन मंदिर में धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि निस्वार्थ भाव से पर के प्रति जो कार्य किया जाता है वह परोपकार कहलाता है एवं आत्मा के प्रति या आत्मा के समीप आने के लिए जो हमारा कार्य है वह परोपकार है। आचार्य इन्द्रनन्दी महाराज शनिवार को विहार से पूर्व श्रद्धालुओं को कहा कि परोपकार शब्द की व्याख्या तीन रुपों में की जाती है जैसे लोकाचार में दीन दुखियों की सेवा करना परोपकार है एवं आगमाचार में देव शास्त्र और गुरु की सेवा करना और जिनवाणी मां की सेवा करना और धर्म प्रभावना तथा समाज उत्थान के कार्य में नि:कांक्षित भाव से तत्पर रहना परोपकार है।
अध्यात्म की दृष्टि से ज्ञान ध्यान तपस्या में लीन रहना परोपकार है। उन्होंने कहा कि परोपकार बाहर में नहीं पुस्तकों में नहीं विचारों में होता है भावना में होता है। दूसरों को भोजन कराना भी परोपकार है।
मुनि राजों त्यागी व्रतीयो को आहार देना भी परोपकार है।
अखिल भारतीय जैन धर्म प्रचारक विमल जौंला एवं सुनील भाणजा ने बताया कि आचार्य इन्द्रनन्दी महाराज निर्भय नन्दी महाराज एवं मुनि उत्कृष्ट नन्दी महाराज का दोपहर में गांव बनस्थली से फागी के लिए मंगल विहार हुआ। बनस्थली में मंगल विहार के दौरान
समाजसेवी नरेंद्र जैन सुनील जैन संजय जैन विनय जैन आदित्य जैन केशव जैन अभिषेक जैन अनिता जैन पदमा जैन भावना जैन अंजना जैन ऋषिता जैन कृतिका जैन ने आचार्य श्री संध का चरण प्रक्षालन एवं आरती करके पूजा अर्चना की।
जौला ने बताया कि आचार्य श्री संध बनस्थली से विहार करते हुए



गांव मुकुन्दपुरा पहुंचे जहां जैन समाज के समाजसेवी सुकुमार झण्डा फागी पवन जैन विनोद जैन आदि श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री का पादप्रक्षालन कर अगुवानी की। जौंला ने बताया कि आचार्य इन्द्रनन्दी महाराज संध सहित गांव मुकुन्दपुरा से फागी के लिए मंगल विहार करेंगे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
