आत्मविश्वास और जीने का जुनून हो तो आत्मविश्वास से उठा एक कदम भी विधाता की लिखी को मिटा सकता है
अंतरमना प्रसन्न सागर महाराज।
उदगांव
पूज्य आचार्य श्री अंतरमना प्रसन्न सागर महाराज ने आत्मविश्वास को जीवन में प्राथमिकता देते हुए कहा कि आत्मविश्वास और जीने का जुनून हो तो आत्मविश्वास से उठाए एक कदम भी विधाता की लेखी को मिटा सकता है।
महाराज श्री ने कहा की जीवन का एक कड़वा सच है कि दुनिया एक सराय है और आप और हम सब एक मुसाफिर हैं, एक दिन सबको छोड़कर खाली करके जाना ही पड़ेगा। मगर जाकर भी यहां बने रहने की ख्वाहिश हर एक इंसान की रहती है। और उसके लिए हर संचारी और सन्यासी अपने जीवन को दाव पर लगा देता है।

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महाराज श्री में संसारी और सन्यासी के विषय में समझाया उन्होंने कहा कि संसारी दान, सेवा,परोपकार करके सन्यासी मठ, संस्था, अस्पताल, कॉलेज तीर्थ बनवा कर उसके लिए फिर उसमें कुछ भी करना पड़े। उन्हें ना कद का डर, ना पद का भय, ना समाज की चिंता, ना लोक लाज
ये कैसी अमरता है मरने के बाद-?
महाराज श्री ने प्रश्नचिन्ह लगाते हुए कहा कि यह कैसी अमरता है मरने के बाद ?जो जीते जी सबका दुश्मन बन गया हो, वो मरने के बाद क्या याद किया जायेगा-? किसी ने पूछा – कैसे जानें कि हम मरने के बाद स्वर्ग गये या नर्क-? *एलहमने कहा* — सीधा सा फार्मूला है। जब लोग अर्थी को लेकर मुख्य मार्गो से जा रहे हों और लोग उसकी गाथा गा रहे हों, गुणानुवाद कर रहे हों, तो समझना वह स्वर्ग गया और यदि लोग कह रहे हों कि अच्छा हुआ एक पाप कटा, तो समझना कि वह नर्क गया, भटक गया।
कभी आप खुद से पूछना-? यदि आपको पता लग जाये कि मेरे पास अब जीने के लिये चन्द दिन बचे हैं, तो उस समय आप क्या करेंगे-? क्या बदलना चाहेंगे-? यदि – हाँ तो फिर इन्तजार किस बात का है-? मौत का एक दिन सबका मुकर्रर है। उन्होंने कहा इसलिए जिन्दगी को जीवन्त होकर जीयें, महज इसके साथ टाइम पास नहीं करें…। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
