तपस्वी सम्राट आचार्य श्री 108 सन्मति सागर महाराज के समाधि दिवस पर भावभीनी अभिव्यक्ति
इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं आचार्य श्री 108 सन्मति सागर जी महाराज जैसे उग्र तपस्वी संत इस धरा पर बिरले ही होते हैं।
जिनको भी उनके दर्शन एवं उनका सानिध्य, उनका आशीष मिला है अपने आप को धन्य एवं सौभाग्यशाली मानते हैं। उनकी निष्प्रहता निर्मोहीता का शब्दों से करवाना असीमित हैं।
उनके सानिध्य एवं इस नगर को वर्षा योग मिला है वह नगरवासी ऐसे भूल नहीं सकते। क्योंकि वह नगर वासियों के लिए अनंत पुण्य का योग होता था
ऐसा ही पुण्य का अवसर रामगंज मंडी नगर को सन 1991 में प्राप्त हुआ थासंतो के संत महातपस्वी आचार्य श्री सन्मति सागर जी महाराज संघ का वर्षायोग सन 1991 मे रामगंजमंडी नगर को मिला जो नगर के लिये कभी न भुलाये जाने पल है उनका अनुशासन उनका संयम उनका त्याग देखते बनता था।
संस्मरण

1991 मे वर्षायोग का समय आने कॉ था समाजजन श्रेष्ठीजन वर्षायोग नगर मे हो इसके लिये उत्साहित थे सभी ने सहमति के साथ सुसनेर मध्यप्रदेश तपस्वी सम्राट आचार्य श्री सन्मति सागर जी महाराज को श्रीफल भेट करते हुये वर्षायोग हेतु निवेदन किया
आचार्य भगवन ने नगर के निवेदन को सुना और शायद नगर का पुण्य हिलोरे मार रहा था आचार्य भगवन ने रामगंजमंडी की विनती को स्वीकार किया तब श्रेष्ठी जन ने कहा आचार्य श्री हम कल पूरी व्यवस्था के साथ आयेगे पर गुरुवर तो गुरुवर है उन्होने कहा अभी रामगंजमंडी की और विहार सचमुच यह किसी अतिशय से कम नहीं
ऐतिहासिक आगवानी
इन्द्र देव भी मेहरबान रहे

आचार्य संघ की जो आगवानी हुयी वह गदगद कर देने वाली थी मेरी उम्र छोटी थीपर वह द्रश्य आज भी मेरी स्म्रति पर अंकित है जैसे नगर की सीमा पर आचार्य भगवन की संघ सहित कमल फिलिंग पर आगवानी की गयी वही इन पलो मे इन्द्र देव भी जमकर आये नगर मे तोरण द्वार शत नमन नमन के बेनरो से अटा था सम्पूर्ण नगर दुल्हन की तरह सजा हुआ था ऐसा समवशरण देख हर कोही अभिभूत था
महती तप आराधना
आचार्य भगवन तप त्याग की प्रतिमूर्ति थे उनके तप का ही प्रभाव रहा अनेकों तपस्या हुयी दस उपवास 5 उपवास 3 उपवास आदि जितनी तपस्या उस समय हुयी शायद उतनी तपस्या नगर के इतिहास मे देखने को नहीं मिली।
विधान सम्पन्न
आचार्य भगवन की निश्रा मे नगर मे अनेकों विधान सम्पन्न हुये जिसमे सिद्धचक्र महामण्डल विधान भी हुआ जो उल्लास उमंग और भक्ति के साथ हुआ
दीक्षा सम्पन्न


आचार्य भगवन के द्वारा 18 NOV 1991 को रामगंजमंडी का कृषि उपज मंडी यार्ड इसका साक्षी है जब कठियावाड गुजरात के बसंतीलाल जी ब्रह्मचारी जी को दिगंबरतव दीक्षा दी गयी और उन्हे मुनि श्री 108 शुभसागर जी महाराज नाम दिया गया दीक्षा से दो दिन पूर्व उनकी नगर मै भव्य बिंदोरी भी निकाली गयी
दीक्षा दिवस व पिच्छिका परिवर्तन
19 NOV 1991 को आपका भव्यता के साथ दीक्षा महोत्सव मनाया गया कृषि उपज मंडी यार्ड इसका साक्षी बना और संघ सहित पिच्छिका परिवर्तन हुआ
नगर का चातुर्मास उन्होने सर्वोतम चातुर्मास मे एक बताया
रामगंजमंडी नगर मे जो वर्षायोग मे प्रभावना हुयी और जो कुशलता से सम्पन्न हूआ उसे आचार्य भगवन ने अपने सर्वोतम चातुर्मास मे एक बताया जों नगर के लिए किसी गौरव से कम नहीं
तप साधना
आपकी साधना को मुझे नजदीक से देखने को मिला जो मेरे लिये किसी पुण्य से कम नहीं एक छोटे से पटिये पर घंटो साधना करना उसी पर विश्राम करना सचमुच कोई बिरला साधक ही कर सकता है
आजीवन अन्न त्याग


आपका आजीवन अन्न का त्याग रहा और एक आहार एक उपवास की साधना करते थे वही जीवन के अंतिम क्षणो मे तो केवल छाछ और पानी लिया करते थे धन्य है ऐसे साधक
वात्सल्य की प्रतिमूर्ति
रामगंजमंडी नगर पर उनका आशीष निरंतर रहा जब नगर वासी उंनके दर्शन को जाता वह मुस्कान देते और आशीष प्रदान करते और श्रेष्ठी जनो से नगर के वर्षायोग की सराहना करते है
तुम विश्व धर्म के सूरज हो
तप त्याग की अद्भुत मूरत हो
है धन्य धन्य महिमा तेरी तम हरने वाले सूरज हो
एक रिपोर्ट अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमंडी
