आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज का झालरापाटन से हुआ मंगल विहार सजल नेत्रों से समाज जनों ने दी विदाई दुकान की तरह मन को भी करो साफ आचार्य श्री

धर्म

आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज का झालरापाटन से हुआ मंगल विहार सजल नेत्रों से समाज जनों ने दी विदाई दुकान की तरह मन को भी करो साफ आचार्य श्री
झालरापाटन।
नगर में चार माह से चातुर्मास कर रहे महावीर तपोभूमि उज्जैन, कल्पतरु पार्श्वनाथ धाम प्रणेता एवं पर्यावरण संरक्षक आचार्य श्री 108प्रज्ञा सागर महाराज ने ससंघ का सोमवार को झालरापाटन से अतिशय क्षेत्र कैथूली के लिए पदयात्रा के साथ मंगल विहार किया। शांतिनाथ दिगंबर जैन बाड़ा में मौजूद समाज के पुरुष, महिलाओं, युवक युवतियों ने सजल नम आंखों और भारी मन के साथ आचार्य को मंगल विहार के लिए पदयात्रा के रूप में रवाना किया।

 

यहां से शुरू हुई पदयात्रा में डीजे, घुड़सवार, ऊंट गाड़ियां, बग्गियों के साथ दिगंबर जैन समाज के साथ ही अन्य समाज के लोग जैन धर्म और आचार्य प्रज्ञा सागर का जयकारा लगाते आचार्य संघ के साथ पैदल चल रहे थे। मार्ग में जगह-जगह पदयात्रा का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। अचार्य संघ का सोमवार को रात्रि विश्राम सांसद कार्यालय झालावाड़ में हुआ। और मंगलवार सुबह पदयात्रा रामगंज मंडी के लिए प्रस्थान करेगी।

मंगल विहार से पूर्व धर्म सभा में उपस्थित जन सैलाब
आस्था का समावेश झालरापाटन नगर में मंगल विहार से पूर्व

दुकान की तरह अपने मन को भी रख साफ। आचार्य श्री 

   

ऐतिहासिक मंगल विहार
अपार भक्तों की उपस्थिति में गुरुदेव झालरापाटन नगरी से मंगल विहार करते हुए
उत्साह से लबरेज महिला शक्ति पदयात्रा में
नम आंखों से झालरापाटन नगर गुरुदेव को मंगल विदाई देते हुए

आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज ने मंगल विहार से पूर्व आयोजित धर्मसभा में कहा कि जिस तरह से आप अपने घरों और प्रतिष्ठानों में सफाई रखते हैं। उसी तरह हमें अपने मन को भी साफ सुथरा रखना है। कोई भी व्यर्थ विचार हमारे मन में नहीं होने चाहिए। दीपावली पर दीपक जलाते हैं। अर्थात हमें अपने मन के तार परमात्मा से जोड़कर अपनी आत्म ज्योति जगानी है। दीपावली, नव वर्ष में व्यापारी अपने पुराने बहीखाते बंद कर नए बहीखाते बनाते हैं अर्थात पुराने स्वभाव संस्कार को समाप्त कर नया दिव्य गुण धारण करने का खाता बनाना है। सभी हमेशा मधुर वाणी का प्रयोग करें। सभी को दुआओं रूपी गिफ्ट देनी है और लेनी चाहिए। मनुष्य को दिव्य गुणों और शक्तियों से भरपूर होना चाहिए। इच्छाएं वश में करना ही तप है।

 

आचार्य ने कहा कि शास्त्रों में तप कीव्याख्या मे बताया है कि इच्छाओं का निरोध करना ही तप है। जब तक इच्छा के वश में रहोगे आपका कल्याण नहीं हो सकता है। यदि इच्छाओं को अपने वश में कर लिया तो फिर आप सर्वोच्च पद अर्थात मोक्ष की प्राप्ति भी कर सकते हैं।

 

समाज के प्रवक्ता यशोवर्धन बाकलीवाल व मनीष चांदवाड ने बताया कि आचार्य 17 जुलाई 2024 से यहां पर चातुर्मास के लिए विराजमान थे। इस दौरान उन्होंने अनेक सामाजिक, धार्मिक संगठनों को साथ लेकर नगर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया और पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए जगह-जगह बड़ी संख्या में पौधारोपण करवाया।

 

 

ऐतिहासिक रहा गुरुदेव का प्रवास
यू कहे यह चातुर्मास हर तरह से ऐतिहासिक चातुर्मास रहा पूज्य गुरुदेव के सानिध्य में 10 लक्षण पर्व की बेला में उग्र तपस्या हुई। इसके साथ ही पर्यावरण को शुद्ध रखने के उद्देश्य से गुरुदेव की प्रेरणा से विशाल स्तर पर वृक्षारोपण किया गया। यदि हम और कर करें तो गुरुदेव ने चातुर्मास पूर्व कहा था कि यह चतुर्मास्थ पर्यावरण को समर्पित है वैसा ही देखने को मिला वहीं एक पायदान बढ़ाते हुए यह चतुर्भुज जीव दया परोपकार के क्षेत्र में भी अग्रणीय कहा जाएगा नगर पालिका झालरापाटन के सहयोग से पक्षियों के दाने हेतु पक्षी टावर का निर्माण गुरुदेव की प्रेरणा से हुआ जिसका लोकार्पण भी गुरुदेव के कर कमलो से हुआ। वही एक अहिंसा सर्किल का निर्माण भी गुरुदेव की प्रेरणा से हुआ। यह वर्षा योग हाडोती के इतिहास में झालरापाटन के इतिहास में चिरकालिक रहेगा और ऐसा वर्षा योग ना भूतों ना भविष्यति है।
नलिन जैन लुहाड़िया से प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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