मायाचारी और क्रोधी व्यक्ति को कोई पसंद नहीं करता है पूर्णमति माताजी
ग्वालियर
जीवन जितना सरल होगा उतना ही अच्छा होगा। यह उदगार आर्यिका 105 पूर्णमति माताजी ने नया बाजार जैन मंदिर में चल रहे कल्याण मंदिर स्तोत्र विधान के चौथे दिन धर्म सभा में कहे। माताजी ने कहा कि हमें तीर्थंकर भगवान के संदेश का अनुसरण करते हुए हर जीव से प्रेम और उसकी रक्षा करनी चाहिए। दूसरों के दुखों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। जब जीव कर्मों को अपनी आत्मा से संपूर्ण रूप से मुक्त कर दे तो वह स्वयं भगवान बन सकता है। लेकिन इसके लिए उसे सम्यक पुरुषार्थ करना पड़ता है।
माताजी ने कहा कि अपने मन को सरल, संयमित बनाते हुए प्रभु के प्रति अगाध समर्पण रखने वाले लोग ज्यादा दिनों तक धरा पर नहीं रहते, भव बंधन से बाहर निकलकर वे शीघ्र ही मोक्ष को प्राप्त हो जाते हैं। हम क्या हैं, यह हमारा खुद का मन और प्रभु अच्छी तरह से जानते हैं।
मायाचारी और क्रोधी व्यक्ति को कोई पसंद नहीं करता है। जैन दर्शन में अहिंसा को सर्वोच्च स्थान दिया गया है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
