दसवीं सदी के जैन मंदिर के समीप से बिछाई जा रही थी रेल लाइन आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया ने लगाई रोक

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दसवीं सदी के जैन मंदिर के समीप से बिछाई जा रही थी रेल लाइन आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया ने लगाई रोक
चांदपुर
झांसी रेल मंडल के धौरा जाखलीन सेक्शन में प्राचीन चांदपुर जैन मंदिर के समीप से तीसरी रेल लाइन बिछाई जाने के काम पर आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने रोक लगा दी है यह रोक संरक्षित पुरासंपदा को क्षति पहुंचने की आशंका के चलते एएसआई ने आपत्ति उठाई।

इसे देखते हुए रेलवे को दोबारा सर्वे कराकर रेलवे ट्रैक पांच किलोमीटर घुमाकर डालना पड़ रहा है। इसके लिए शासन स्तर पर भूमि अधिग्रह की प्रक्रिया शुरू हो गई है।बीना से झांसी के बीच 153 किमी लंबी रेल लाइन बिछाई गई है। अलग-अलग सेक्शन में इस लाइन से ट्रैफिक चालू कर दिया है। धौरा-जाखलौन रेलखंड में 10 किमी रेलवे लाइन बिछाना शेष रह गयाथा। ट्रैक बिछाने का काम शुरू होते ही एएसआई ने आपत्ति लगा दी।

 

सरकार कोबताया है कि यहां 10वीं सदी का प्राचीनजैन मंदिर है, जो भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीन आने वाला संरक्षित क्षेत्र है।रेलवे लाइन मंदिर से बमुश्किल दो मीटरदूर से डाली जा रही थी, जिससे पुरासंपदाको क्षति पहुंचने की आशंका है। एएसआई
की आपत्ति के बाद मंदिर के पास रेलवेलाइन का काम रोक दिया है। लाइनबिछाने के लिए रेलवे को दोबारा सर्वेकराना पड़ा। नए सर्वे के अनुसार रेलवेलाइन को 5.1 किमी घुमाकर बिछाया जा रहा है, जिससे बीना-झांसी के बीच रेलवे थर्ड लाइन की दूरी पांच  किलोमीटर बढ़कर 153 के स्थान पर 158.1 किमी हो।जाएगी

मंदिर से लगकर निकल रही थी लाइन-

भारतीय पुरातत्व विभाग झांसी मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद आईहाशमी ने बताया कि भारतकी ऐतिहासिकधरोहर चांदपुर जैन मंदिर से बमुश्किल दो मी मीटर दूर से रेलवे लाइन डाली जा रही थी। इससे प्राचीन पुरासंपदा को क्षति पहुंचसकती थी। इसके चलते रेलवे लाइन डालने पर आपत्ती ली गई है। संरक्षित क्षेत्र में किसी भी तरह का निर्माण वर्जित है।

शांतिनाथ भगवान की 22 फीट ऊंची प्रतिमा मौजूद
चांदपुर तीर्थ क्षेत्र प्रकृति की गोद मेंस्थित है। एएसआई की खोज में पताचला था कि यह मंदिर 10वीं सदी मेंबनाया गया है। तीर्थ क्षेत्र का मुख्यआकर्षण भगवान शांतिनाथ की 22फीट ऊंची प्रतिमा है। कायोत्सर्ग मुद्रामें स्थापित है। यह प्रतिमा देशी पाषाणको काटकर बनाई गई है। प्रतिमा केशीर्ष पर तीन पाषाण छत्र और मुखमंडल के चारों ओर विशालआभामंडल है। यह तीर्थ क्षेत्र भारत की आध्यात्मिक धरोहर है। यह ललितपुर जिले के पाली गांव से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित है।धोरी रेलवे स्टेशन से तीर्थ क्षेत्र की दूरी मात्र 55 किमी है।

 

आपत्ति के बाद अब घुमाई जा रही है लाइन

एएसआई की आपत्ति के बाद रेलवे लाइन को घुमाकर डाला जा रहा है। इससे रेलवे ट्रैक की लंबाई 5.1 किलोमीटर बढ़ जाएगी। इसके लिए सर्वे हो चुका है,शासन स्तर पर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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