गणिनी आर्यिका 105 विशुद्ध मति माताजी का 50 वा गणिनी पदारोहण दिवस 50 से अधिक पिछिधारी साधु संतों की उपस्थिति में शाश्वत तीर्थ सम्मेद शिखरजी में मनाया गया

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गणिनी आर्यिका 105 विशुद्ध मति माताजी का 50 वा गणिनी पदारोहण दिवस 50 से अधिक पिछिधारी साधु संतों की उपस्थिति में शाश्वत तीर्थ सम्मेद शिखरजी में मनाया गया
सम्मेद शिखरजी
शाश्वत तीर्थ सम्मेद शिखर जहां का कण-कण पावन और पवित्र है ऐसी पावन स्थल पर पूज्य गुरु मां गणिनी आर्यिका 105 विशुद्ध मति माताजी का 50 वा गणिनी पदारोहण दिवस रविवार को कच्छी भवन परिसर में मनाया गया।

   

तीन दिवसीय इस आयोजन में प्रथम दिन सहस्त्रनाम महामंडल विधान किया गया जो घट यात्रा ध्वजारोहण के साथ संपन्न हुआ जिसकी पूर्णाहुति द्वितीय दिन हुई व रात्रि में खुशबू जैन नाईट के द्वारा भव्य भजन संध्या में सभी ने भक्ति के रस में सराबोर होकर अभूतपूर्व भक्ति की ।

 

 

 

रविवार की पावन बेला एक नया इतिहास लिख गई जब अनेक आचार्य मुनि, व आर्यिका माताजी इस आयोजन में सम्मिलित हुई जिसमें वयोवृद्ध आचार्य श्री 108 संभव सागर महाराज संघ सहित, आचार्य श्री वैराग्य नंदी महाराज संघ सहित आचार्य प्रसन्न ऋषि महाराज एवं अनेक माताजी के सानिध्य में गुरु मां का गणिनी पद आरोहण दिवस मनाया गया। यह एक ऐसा आयोजन था जिसमें विनय वात्सल्य देखने को मिला।


दोपहर की बेला में शुरू हुए इस आयोजन में सर्वप्रथम मुख्य अतिथि टोंक जिला प्रमुख श्रीमान सरोज नरेश बंसल द्वारा चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन किया गया। इसी के साथ संग पति श्रीमान कैलाश जैन खेड़ा, देवेंद्र जैन टोंगिया, जेके जैन, भागचंद लुहाड़िया इंद्र ध्वज जैन आदि ने गुरु मां के चरणों का पद प्रक्षालन किया। इस आयोजन को तीन गणिनी आर्यिका माताजी संघ एवं तीन आचार्य महाराज संघ का साक्षात समागम सभी को देखने को मिला।

 

 

इन अभूतपूर्व बेला में विनय संपन्नता का भाव जब देखने को मिला तब जब आचार्य श्री संभव सागर महाराज, आचार्य श्री वैराग्य नंदी महाराज आचार्य श्री प्रसन्न ऋषि महाराज का समस्त मौजूद आर्यिका संघ ने भाव भरी आगवानी की। समस्त आचार्य महाराज का गणिनी गुरु मां विशुद्ध मति माताजी एवं पट्ट गणिनी विज्ञ मति माताजी ने एवं मौजूद समस्त माताजी ने समस्त आचार्य संघ एवं मुनि संघ का मंगल आशीष लिया जब पूज्य गुरु मां विशुद्ध मति माताजी ने ज्येष्ठ आचार्य श्री संभव सागर महाराज एवं मौजूद समस्त आचार्य संघ को विनय भाव से नमोस्तु निवेदित किया वह दृश्य विनय भाव को दर्शा रहा था और आचार्य श्री ने गुरु मां को मंगल आशीष प्रदान किया। इन दृश्यों को देख मौजूद भक्तजन भाव विहल हो उठे।
पूज्य गुरु मां विशुद्ध मति माताजी ने आचार्य श्री संभव सागर महाराज, आचार्य श्री वैराग्य नंदी महाराज को नवीन पिछिका भेट की।

 

 

 

 

पूज्य माताजी से मेरा जन्म जन्म का संयोग है। विभाश्री माताजी
इस अवसर पर पूज्य गुरु मां विशुद्ध मति माताजी के प्रति अपने भाव प्रकट करते हुए गणिनी आर्यिका 105 विभाश्री माताजी ने कहा की पूज्य माता जी के 50 वे गणिनी दिवस पर आना मेरा जन्म जन्म का सहयोग है। उन्होंने कहा कि पूज्य माता जी का जन्म भी ग्वालियर में हुआ है और मेरा भी जन्म ग्वालियर में हुआ है उन्होंने पूज्य माता जी के प्रथम दर्शन को स्मृति में लाते हुए कहा कि वर्ष 2002 में मैंने ग्वालियर में माता जी के प्रथम दर्शन किए थे। उन्होंने कोटा में आयोजित गुरु मां के 50 वे दीक्षा दिवस का जिक्र करते हुए कहा कि पूज्य माता जी के 50 में दीक्षा दिवस जो कोटा में मनाया गया उस समय गुरु मां के समीप आने का अवसर मिला। और उसी वर्ष 8 दिन बाद मेरा 25वां b दीक्षा दिवस कोटा में मनाया गया। उन्होंने कहा कि यह संयोग ही कहा जाएगा कि इस वर्ष गुरु मां का 50 वा गणिनी पद दिवस मनाया जा रहा है। उस समय मेरा 50 समाज जन्मदिवस है। इस अवसर ग्वालियर दिगंबर जैन समाज द्वारा पूज्य गणिनी माता जी गणिनी पद शिरोमणि का अलंकरण प्रदान किया गया। इसी बेला में पूज्य पण्डित श्री अजीत शास्त्री ग्वालियर ने गुरु मां के जीवन कृतित्व पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर गुरु मां के प्रति आर्यिका सुज्ञानमति माताजी ने कहा आज हर्ष का विषय है आज एक साध्वी को गणिनी पद पर 50 वर्ष पूर्ण हुए। उन्होंने कहा आर्यिका को दीक्षा लिए 50 वर्ष तो कही आर्यिका माताजी के हो गए लेकिन गणिनी पद पर 50 वर्ष विशुद्धमति माताजी को हुए। उन्होंने कहा यदि प्रथम रूप में यदि किसी साधु साध्वी को देखा तो माताजी को देखा। फिरोजाबाद की स्मृति को सांझा किया। उन्होंने कहा माताजी मेरी रग रग में बसी हुई है। उन्होंने कहा बाते बदल ली, लेकिन आदतें नही बदली,लिखती मैं पहले भी थी लिखती मैं आज भी हु। करदार बदल गए पर भाव नही बदले। प्यार मैं पहले भी करती थी आज भी करती हु। जिंदगी बदल गई पर चाहत नही बदली तड़पती में पहले भी थी तड़पती में आज भी हु। रास्ते बदल गए पर मंजिल नही बदली। पहले भी प्रभु आप भी थे आज भी प्रभु आप ही हो।
इस आयोजन में भक्ति की श्रंखला भी चंबल की इस वसुंधरा ने बीज भक्ति का बो दिया
विशुद्धमति माताजी ने सबके मन को मोह लिया जैसे भक्तिमय भजनों की गुंज सुनाई दी।
वही गुरु मां के प्रति अपनी भवाभिव्यक्ति प्रकट करते हुए गणिनी आर्यिका पुनीत चैतन्यमति माताजी ने कहा आज हम कोई भी निमित्त को पाकर आज उनके गुणों का गुणानुवाद करने का हमे सौभाग्य प्राप्त हुआ है, उन्होंने माताजी के वात्सल्य भाव के प्रति कहा कि जब से हम शिखरजी में आए हैं तबसे माताजी का मुझे बहुत वात्सल्य मिला है। जगत की मां तो भभकी देकर हमें सुला देती हैं। परंतु यह ऐसी मां है देखो कितनी सारी बेटियों को भभकी देकर जगा दिया, और जागरूक करके संयम मार्ग पर लगा दिया यह होती है असली मां उन्होंने कहा मां, महात्मा, परमात्मा को कभी नहीं भूलना चाहिए। मां के रूप में विशुद्ध मति माताजी महात्मा के रूप में मौजूद आचार्य संभव सागर महाराज जो हमें धर्म मार्ग पर लगा रहे हैं। अंत भला तो सब भला जीवन के अंत समय में परमात्मा कचरा निकाल लो तो तो निश्चित रूप से हमारा मरण शुभ मरण और समाधि मरण हो सकता है। माताजी यह अक्षर मुझे अक्षय निधि की यात्रा कराएं ऐसा मुझे आशीर्वाद देना। हमारी जिनवाणी मां विशुद्ध मति माताजी ही है।
उन्होंने कहा इस युग की सार है।
विशुद्धमति मां प्राण है
ज्ञान की तू खान है
चारित्र परिधान है।
जिनके और में बहती कल कल गंगा की धारा
त्याग और मोती से जिसने विश्व को श्रृंगारा
मिलती रहे आपकी आशीष की छाया कभी ना रहे गम का साया
मन अति हर्षाया
पुनीत चैतन्य मति माताजी ने शीश नमाया।
इस अवसर पर शुभमति माताजी ने जब गुरु मां के प्रति अपने उद्गार प्रकट किए तो सारा मंच भाव वियल हो उठा और उन्होंने भाव भी ने शब्दों में गुरु मां के वात्सल्य और साधना के प्रति पुरानी स्मृति को ताजा करते हुए प्रज्ञा पद्मिनी पट्ट गणिनी आर्यिका 105 विज्ञमति माताजी की जमकर तारीफ की।
और कहां मेरी कोई हस्ती नहीं है, मेरा कोई वजूद नहीं है।
मैं मेरी मां के चरणों की धूल भी नहीं हूं। शानदार भक्तिमय प्रस्तुति के साथ कहा
ओ मेरी मां ओ मेरी मां विशुद्धमति जी
तेरे चरण पखारु में, तेरी भक्ति करूं मैं, हर पल तेरे साथ रहूं। तेरे ही हृदय में रहूं।

पूज्य माता जी ने कठोर अनुशासन में हमें ज्ञान देने का प्रयास किया विज्ञ मति माताजी
इस पुनीत अवसर पर प्रज्ञा पद्मिनी गणिनी विज्ञमति माताजी द्वारा माताजी के प्रति भाव अभिव्यक्ति देते हुए सभी गुरु चरणों में नमन किया और कहा कि सभी ने अपनी अपनी बात रखी लेकिन मैं किन शब्दों में गुरु मां का गुणानुवाद करू यह मैं समझ नहीं पा रही हूं। उन्होंने पूज्य माता जी के प्रति विनय भाव रखते हुए कहा कि पूज्य माताजी ने कठोर अनुशासन में हमें ज्ञान दिया। अब हमारे पात्र में कितनी ताकत थी,यह हमारे पात्र पर निर्भर करता है। उन्होंने गुरु की गुरूता के प्रति गीत के द्वारा अपनी भाव अभिव्यक्ति दी।
न मुझमें गुण है न ही सरलता है विशुद्धमती माताजी
इस अवसर पर गणिनी विशुद्ध मति माताजी ने अपने भावभीनी वाणी से कहा कि मुझे कुछ बोलने को कहा जा रहा है। नही समझ पा रही हु। ना मुझ में सरलता है ना मैं पढ़ी-लिखी हूं। लेकिन आप सभी की भावनाओं आप सभी की शुभकामनाओं से।
उन्होंने कहा यह जन्म मरण की प्रक्रिया अनादि काल से चली आ रही है और जब तक से किनारा नहीं होगा तब तक इस संसार में विचरण करना पढ़ेगा। उन्होंने संभव सागर महाराज से कहा कि मुझे भी स्वमाला देकर ताकि उन्हें फेरते हुए मैं संसार को उत्तीरण कर सकू। और अपने जीवन में सरलता सौम्यता को आगे बढ़ाऊं। क्योंकि यह सम्यक दर्शन की एक सीढ़ी है। उन्होंने कहा 8 अंकों का पालन करने वाला ही सम्यक दर्शन प्राप्त कर सकता है। मैं भगवान से यही आशीर्वाद चाहती हूं कि मेरा वह सम्यक दर्शन ही नहीं मेरे अंदर रत्नत्रय वृद्धिगत होता रहा है। और शीघ्र ही संसार का उत्तीरण कर सकू। गुरुदेव से आशीर्वाद चाहती हु। इस अवसर पर आचार्य श्री प्रसन्न ऋषि महाराज ने कहां की आज बड़े हर्ष का दिन है, आज विशुद्धमती माताजी का 50 वा गणिनी पदारोहण दिवस है। उन्होंने कहा कि विशुद्ध मति माताजी ने कितना संघर्षमय जीवन जिया होगा कठिन परिस्थितियों में 50 वर्ष का गणिनी पद का दायित्व निभाया। हम यही कामना करते हैं कि आपका आपका यह गाणिनी पद समारोह हम 100 साल तक मनाते रहे। आपकी साधना अविरल रहे। इस अवसर पर आचार्य वैराग्यनंदी महाराज ने कहा कि माताजी का स्वभाव इतना निर्मल है कि बच्चा भी उनके पास जाकर आशीर्वाद लेता है। माताजी में सरलता सौम्यता व करुणा है। विज्ञमति माताजी के विषय में कहा कि पूज्य माता जी ने अपना सारा भार विज्ञमति माताजी पर डाल दिया। उन्होंने कहा उगता हुआ सूर्य, खिला हुआ फूल जलता हुआ दीपक,बहता हुआ झरना किसी परिचय का मोहताज नहीं होता। उन्होंने एक भावुक क्षण को साझा किया कि जब माताजी विशुद्ध मति जी सड़क पर बिहार कर रही थी तब माताजी का एक्सीडेंट हुआ वह माताजी के पाव पर 51 टांके आए टांके वाले ने टांके लगाए। उन्होंने उफ नही उन्होंने कहा संयम ले लेना और संयम का पालन करना आसान नहीं है। दीक्षा ले लेना आसान है लेकिन दीक्षा का पालन करना आसान नहीं है। इस अवसर पर आचार्य संभवसागर महाराज ने भी अपना मंगल आशीष गुरु मां को प्रदान किया।समस्त आयोजन में बाल ब्रह्मचारी आशीष भैया पुण्यांश एवम अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वाणी भूषण पंडित संहिता सुरी श्री अजीत शास्त्री का विशेष सहयोग रहा साथी इस आयोजन में संगीत स्वर केशव एंड पार्टी भोपाल बिखेरी। समस्त आयोजन में गौरव अध्यक्ष के रूप में अशोक मंजू पहाड़िया कोटा ने अपनी सहभागिता दी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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