मुनि श्री क्षमासागर जी महाराज सप्तम समाधी दिवस भाव भीनी विनयांजलि

धर्म

मुनि श्री क्षमासागर जी महाराज सप्तम समाधी दिवस भाव भीनी विनयांजलि


साधना की प्रतिमूर्ति काव्य ह्रदय क्षमासागर जी महाराज सचमुच क्षमा की मूर्ति थे उनकी साधना उनका त्याग सचमुच अभूतपूर्व था उनका आशीष उनका सानिध्य काफी नज़दीक से मुझे मिला वर्ष 2003 का वह वर्षायोग जो रामगंजमंडी राजस्थान की धरा पर जो एक नया इतिहास लिख गया जिसमे युवा शक्ति धर्म मार्ग पर बढ़ी साथ ही युवाओ को प्रेरणा देता हुआ यंग जैना अवार्ड हुआ जो भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ वह आयोजन एसा था जिसकी चर्चा भी आज भी होती है मेने उन पलो को करीब से देखा जब नगर मे उच्च शिक्षा की और अग्रसर छात्र छात्राए आहारदान दे रही थी वह पुण्य वह स्वर्णिम अवसर हमारे आवास को मिला आज वह युवा उच्च पदों पर आसीन है कोई डॉक्टर वह कोई इंजिनियर बन धर्म मार्ग पर चलते हुए देश की सेवा कर रहे है
अपने प्रवचनों से सभी को भावुक कर देते थे
जब पूज्य मुनि श्री अपना प्रवचन देते थे वह स्वयं भी भावुक हो जाते थे साथ ही सुनने वाला भी भावुक हो जाता था पूज्य मुनि श्री का उद्बोधन जीवन को अच्छा बनाने के साथ कर्म सिद्धांत की और होता था जो आज भी प्रेरणा देता है हर कोई आज भी उनकी वाणी को सुन अपने जीवन को सदमार्ग की और अग्रसर कर रहा है न जाने कितने के जीवन उन्होने उन्नत किया पूज्य मुनि श्री कहा करते थे कोई केसे भी धर्म कर रहा है उसे करने दो वह कहते थे कुछ न करने से अच्छा है कुछ करना अच्छा है अन्रेजी मे कहा करते थे SOMETHING IS BETTER THAN NOTHING उनकी सोम्यता उनका संयम आज भी स्मृति पर अंकित है
काव्य रचना मार्मिक थी
पूज्य मुनि श्री काव्य रचनाए सभी के लिए प्रेरणा बन आज भी गुंजायमान है उनकी काव्य रचनाए जो उन्होने लिखी जो गुरु गुणानुवाद करते लिखी जिसमे जो ज्योति सा मेरे ह्रदय मे रौशनी देता गया साथ ही दीप उनका गीत उनका मै चल रहा हु जेसी रचनाए उनके गुरु अनुराग व विनय को परिलक्षित करती थी साथ ही जीवंत सत्य को परिलक्षित करती अरिहंत नाम सत्य है काव्य रचना आज भी गुंजायमान है
संस्मरण श्राविका की समाधी भावना को और उन्नत किया
वर्ष 2003 का वह समय जब मुनि श्री क्षमासागर जी महाराज का वर्षायोग पूर्णता की और चल रहा था उनका आहार धर्मनिष्ट उदारमना प्रतिमाधारी श्रीमती हंगामबाई बाबरिया के आवास पर हुआ वह शुरू से धर्म मार्ग पर थी वह अस्वस्थ थी लेकिन गुरु चरणों को पाकर वह गदगद थी उनका आभामंडल गदगद कर देने वाला था उन्होने महाराज श्री से समाधी की भावना की कहा मेरा समाधीमरण अच्छे से हो यह भावना व्यक्त की महाराज श्री ने भाव विहल शब्दों के साथ उनको सम्बोधा और कहा आपकी यह भावना उन्नत होगी इस पुनीत कार्य मे उनके पुत्र व पुत्रवधू प्रमोद रजनी बाबरिया वह परिवार समर्पित रहा
कुछ पंक्तिया मुनि चरणों
दया क्षमा के धारी थे
क्षमा नाम के धारी थे
यथा नाम तथा गुण को सार्थक करते थे
वे क्षमासागर नाम अवतारी थे
काव्य सृजन मार्मिक करते थे
जिनधर्म की ज्योति थे
युवाशक्ति उत्प्रेरक थे
प्राणी मात्र कल्याण प्रेरक थे
वे क्षमा नाम अवतारी थे
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी

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