जयपुर शहर में श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर भट्टारक जी की नसियां में चल रहे 256 मंडलीय सिद्धचक्र महामंडल विधान में आज 32 अर्घो से पूजा हुई

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जयपुर शहर में श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर भट्टारक जी की नसियां में चल रहे 256 मंडलीय सिद्धचक्र महामंडल विधान में आज 32 अर्घो से पूजा हुई

जयपुर/

श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर भटृटारक जी नसियां जयपुर की पावन धरा पर चल रहे 256 मण्डलीय श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान का तीसरे दिन भक्तो को 32 अर्घो के साथ सिद्धचक्र महामंडल विधान की पूजा करने का मंगल अवसर मिला कार्यक्रम की शुरूआत जिनाभिषेक , शांतिधारा, अष्ट द्रव्यों से पूजा करने के बाद गुरु मां के पाद प्रक्षालन के साथ हुई | तत्पश्चात पूज्य भारत गौरव गणिनी गुरु मां विज्ञाश्री माताजी ने अष्टान्हिका पर्व का महत्व बताते हुए प्रवचन में कहा की सब पर्वो में बड़ा पर्व कोई है तो वह है अष्टान्हिका पर्व है ,कार्तिक, फाल्गुन और आषाढ माह के अंतिम आठ दिनो में अष्टम नन्दीश्वर द्वीप में जाकर देवता गण दिव्य द्रव्यो से अकृत्रिम चैत्यालयों की पूजा करते हैं और मनुष्य उस द्वीप में जाने के लिए असमर्थ है इसलिए अपने अपने जिनालयों में जाकर बड़े ठाठ बाट से विधान रचकर भगवान की पूजा करते हैं, पूजन में जो क्रम से अष्ट द्रव्य चढ़ाया जाता है वह जघन्य पंचकल्याणक का रूप है ,जिन प्रतिमा को प्राण-प्रतिष्ठा द्वारा प्रतिष्ठित करना मध्यम पंचकल्याणक है और जो साक्षात सौधर्म इन्द्र तीर्थंकर भगवान के कल्याणक मनाता है वह उत्तम पंचकल्याणक है।

*राजाबाबू गोधा जैन महासभा मीडिया प्रवक्ता राजस्थान

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