मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज के हुए केशलोच

धर्म

मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज के हुए केशलोच
इंदौर
संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर महामुनिमहाराज के परम प्रभावक शिष्य गुणायतन प्रणेता प्रखर वक्ता प्रामाणिक संत मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज का उपवास रहा उन्होंने प्रातः केश-लोंच किया।मुनिश्री ने17 जुलाई को इंदौर शहर में चातुर्मास हेतु मंगल प्रवेश किया था मुनि श्री का इंदौर शहर में यह दूसरा कैशलोंच है,

 

मुनि धर्म रक्षा समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया”कैश लोंच” जैन धर्म के सभी साधु-संतों की एक कठिन तपस्या होती है,इस तपस्या में,दिगंबर जैन संत अपने हाथों से सिर,मूंछ, दाढ़ी के बालों को अपने हाथों से उखाड़ते हैं। जैन मुनि की यह एक साधना है,इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है, अहिंसा धर्म का पालन और अपनी शक्ति का परीक्षण, यदि मुनि श्री कैश लोंच नहीं करेंगे तो उनके सिर दाड़ी मूंछ के बाल बड़ जाऐंगे,और उसमें जुंए लीख आदि हो जाऐंगें जिसको हटाने में हिंसा होगी इसलिये दि. जैन मुनि हर दो से चार माह में कैशलोंच अनिवार्य रुप से करते है,


प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया केशलोंच करते समय, साधु अपने हाथों में कंडे की राख का इस्तेमाल इसलिये करते हैं, ताकि पसीने से उनके हाथ न फिसलें और खून निकलने पर राख लगाने से वह वहीं रुक जाता है।मुनी श्री कहते हैं कि अपने हाथों से बालों को उखाड़ना शरीर को कष्ट देना नहीं है,बल्कि यह शरीर की उत्कृष्ट साधना तथा अपनी शक्ति का अनिवार्य परीक्षण है,जो कि आचार्य गुरुदेव तो प्रत्येक दो माह में अनिवार्य रूप से करते ही थे जैन मुनि समस्त परिग्रहों से रहित होते हैं उनकी चर्या स्वावलंबी होती है, इसलिए बाल हटाने के लिए किसी दूसरे उपकरण का सहारा नहीं लेते।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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