अर्हम गुरु प्रणम्य सागर महाराज एवम मुनिश्री संबुद्ध सागर जी महाराज का हुआ वात्सल्य मिलन
जयपुर
कहते हैं जयपुर राजस्थान की राजधानी है और गुलाबी नगरी है जयपुर अपनी सौंदर्यता के लिए जाना जाता है लेकिन जयपुर नगर विगत कही दिनों से धर्म रूपी गुलाबी प्रभावना से महक रहा है।
जहां अर्हम गुरु प्रणम्य सागर महाराज ने धर्म की महती प्रभावना कर सद मार्ग का उपदेश दिया। जो निश्चित रूप से अविस्मरणीय कहा जाएगा।

वही पूज्य मुनिश्री संबुद्ध सागर जी महाराज ने भी अपनी वाणी से जन-जन का कल्याण किया। सोमवार की अनुपम बेला वात्सल्य अंग और विनय संपन्नता का एक अनुपम उदाहरण प्रस्तुत कर गई जब मीरा मार्ग मानसरोवर में विराजित अर्हम गुरु प्रणम्य सागर महाराज के दर्शनार्थ पूज्य मुनि श्री संबुद्ध सागर जी
महाराज आए जहां क्षेत्र कमेटी ने पूज्य महाराज श्री की मंगल अगवानी की और जब महाराज श्री प्रणम्य सागर महाराज के समक्ष पहुंचे तो उन्होंने मस्तक झुका कर नमन किया नमन कर उनके चरण स्पर्श कर उनकी आशीष ली। निश्चित रूप से यह क्षण एक नया इतिहास एवं अध्याय लिखे गए और वात्सल्य अंग एवं विनय संपन्नता का एक दिव्य अलौकिक उदाहरण प्रस्तुत कर गए। जो युगों युगों तक चिरकालिक रहेगा। जब यह समागम हो रहा था तब एक अलग ही वातावरण दृष्टिगत हो रहा था दोनों महाराज जी एवं संघ के बीच वात्सल्य दृष्टिगत हुआ। इसके साथ ही काफी समय तक धर्म चर्चा एवं शास्त्रार्थ हुआ।




जब यह दृश्य दिख रहे थे तो ऐसा लग रहा था गुरु तेरे चरणों में सर को झुका लिया है।
जमी पर खड़े आसमान को पा लिया है।
यह महामिलन शब्दों की धारा को असीमित कर देता है। संत महामिलन के संबंध में हम महिमा करते हुए यही कहेंगे। इन संतों के मिलन से ही हमारा रास्ता और हमारा मार्ग सद मार्ग बन जाता है। उन्हीं के बताएं मार्ग हमारे लिए सद पथदर्शक बनते हैं।
तुम्हीं से ज्ञान का दीपक जला है, तुम्ही से घनघोर अंधेरा मिटा है, तुम नहीं गुरुजी तो कुछ भी नहीं है हमें रास्तों की जरूरत नहीं है मुझे तेरे पैरों के निशा मिल गए हैं। सब कुछ तुम्हारा सब तुमको अर्पण अब तेरा मैं हूं मुझ में ही तू है हमें रास्तों की जरूरत नहीं है मुझे तेरे पैरों के निशा मिल गए है।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
