पुण्य की राह चुनना आसान नहीं होता इसके लिए मन बनाना पड़ता है पूर्णमति माताजी
ग्वालियर
परम पूजनीय आर्यिका 105 पूर्णमति माताजी ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि पाप की सड़क चिकनी व मनभावन लगती है लेकिन पाप की पगडंडी का अंत दुखद होता है। पुण्य की राह को चुनना आसान नहीं होता है, इसके लिए मन बनाना पड़ता है लेकिन पुण्य अनंत जीवन तक फलदाई होता है। तीसरी पगडंडी वीतरागता की है, इस पथ पर चल पड़े तो अनंत काल तक दुख आते ही नहीं है। इसलिए अपनी आत्मा को वीतरागता के पथ पर प्रशस्त करना है।






उन्होंने कहा कि काल का कारवां कभी रुकता नहीं है। क्षणभर बाद हमारे साथ जो होने जा रहा है उसकी हमें कल्पना तक नहीं है। जीवन जीते हुए दीर्घकाल हो गया, कभी भी सांसों का यह प्रभाव थम सकता है। इसलिए आज और अभी से प्रभु भक्ति में खुद को लीन कर ले , तभी भव सुधार कर तुम मोक्ष धाम को प्राप्त होंगे। अगर आपने किसी को भी व्यथित किया है और आप उस व्यक्ति से कल क्षमा मांगने की सोच रहे हैं तो आज और अभी ही तत्काल क्षमा याचना कर लें। कोई नहीं जानता कि कल तक जीवन है अथवा नहीं।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
