पंचकल्याणक से परिणामो में निर्मलता विशुद्धता लाने का पुरुषार्थ करे आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

धर्म

पंचकल्याणक से परिणामो में निर्मलता विशुद्धता लाने का पुरुषार्थ करे आचार्य श्री वर्धमान सागर जी
पारसोला। 
पंचकल्याणक प्रतिष्ठा में पाषाण और धातु की प्रतिमा में जिनत्व की स्थापना की जावेगी जो क्रियाएं सौधर्म इंद्र तथा अन्य इंद्र द्वारा की जाती है वह धार्मिक क्रियाएं नाटकीयरूप में आप लोगों के माध्यम से की जावेगी सभी को ओ परिणाम में निर्मलता विशुद्धि के साथ धार्मिक क्रिया करना चाहिए ।भावनाओं से सिद्धि प्राप्त होती है। गजू भैय्या राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री ने बताया कि पंचकल्याणक मनोरंजन के साधन नहीं है इसमें आपको मन के स्थिरता प्राप्त कर जिन धर्म और उसके नियम को समझना चाहिए पंचकल्याणक की सभी क्रियाएं नियत समय पर होती है इसलिए प्रतिष्ठाचार्य द्वारा दिए गए आदेशों का अनुशासन पूर्वक पालन करना जरूरी है यह उद्गार आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने पंचकल्याणक प्रतिष्ठा के सभी प्रमुख पात्र , सौधर्म इंद्र ,कुबेर ,चक्रवर्ती आदि पात्रों को मंगल आशीर्वाद में प्रकट की है। आचार्य श्री ने प्रवचन में बताया कि जिस प्रकार आप भोजन को विधि पूर्वक बनाते हैं परिपक्व होने पर भोजन करने पर संतुष्टि और सुख का अनुभव करते हैं उसी प्रकार धार्मिक क्रियो को भी विधिपूर्वक समय पर करना होता है तभी आपको सुख और शांति मिलती है शिल्पी द्वारा बनाई गई प्रतिमा तब तक पूजनीय नहीं होती जब तक उसमें धार्मिक अनुष्ठान पंचकल्याणक के माध्यम से विधिपूर्वक संस्कार नहीं किया जाए अतः धार्मिक अनुष्ठान को समझ कर क्रिया पूर्वक भाव और परिणाम से करने पर मनुष्य जीवन सार्थक होता है आचार्य श्री ने आगे बताया कि संसार का हर प्राणी सुख और शांति चाहता है हमारे आत्म ज्ञान और दर्शन से युक्त है और हम उसे आत्मा की खोज भौतिक सुख के भौतिक सुख के रूप में संसार में कर रहे हैं सुख और शांति धाम के कार्य विधि पूर्वक करने से होती है इसके लिए धर्म को समझना धर्म को ग्रहण करना जरूरी है धर्म को श्रवण करें समझें चिंतन करें तभी आप आत्मा को परमात्मा बनाने का कार्य कर सकते हैं धर्म अहिंसा में है संयम युक्त है इसलिए धर्म संपूर्ण अंगों के साथ करना चाहिए महात्मा गांधी ने भी सत्य और अहिंसा से विदेशी शक्ति से देश को आजाद कराया इसी प्रकार आपकी आत्मा पर कर्म रूपी विदेशी शत्रु है जिन्हें हटाने पर ही आपकी पराधीन आत्मा स्वाधीनता को प्राप्त होकर स्वतंत्र होगी पराधीन आत्मा के कारण आपको सुख और शांति नहीं मिल रही है आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व शिष्या आर्यिका श्री महायश मति जी ने प्रवचन में बताया कि धर्म नगरी पारसोला में आचार्य श्री का 20 वर्षों के बाद आगमन होने से आपकी प्रतीक्षा रूपी प्यास मिट गई आचार्य श्री का आचार्य पदारोहण होने के कारण पारसोला नगर राजस्थान ही नहीं देश और विदेश में भी प्रसिद्ध हो गया है क्योंकि यह आचार्य श्री का मायका पीहर है इसलिए धर्म रूपी जड़ को श्रद्धा और भक्ति के जल से सिंचित करने पर मोक्ष रूपी फल प्राप्त होता है इसलिए गुरु के वचनों को सुनकर समझकर जीवन में व्रत संयम के माध्यम से उतरने का प्रयास करें ।इसके पूर्व सभी इंद्र शरीर की शुद्धि पश्चात आचार्य श्री से मंगल आशीर्वाद लेने सन्मति भवन पहुंचे। 30 साधुओं
का मंगल सानिध्यआचार्य श्री वर्धमान सागर जी सहित 7 मुनिराज,20 माताजी तथा 2 क्षुल्लक जी कुल 30साधुओं के सानिध्य में श्री पार्श्व नाथ जिन बिंब पंच कल्याणक प्रतिष्ठा होगी। अनेक साधुओं सहित अनेक अणुव्रतियों की जन्म नगरी पारसोला है ।श्रीमद जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत प्रतिष्ठाचार्य पंडित हँसमुख शास्त्री के निर्देशन में सभी इंद्र तथा प्रमुख पात्रों के शरीर की मंत्रोचार पूर्वक शुद्धि की गई। सौधर्म इंद्र शची इंद्राणी कुबेर, महायज्ञ नायक यज्ञ नायक , ईशान इंद्र के अलावा सभी इन्द्र-इन्द्राणियां, ध्वजारोहणकर्ता, मंडल कलश स्थापना कर्ता, मंडल उद्घाटन कर्ता, प्रतिमाओं के पुण्यार्जक आदि पात्रों ने प्रतिष्ठाचार्य हंसमुख शास्त्री पंडित कीर्ति जैन के मंत्रोचार निर्देशन में स्थानीय समवशरण जिनालय में पूजन कर
आज सभी प्रमुख पात्रों सहित सभी पात्रों का कांकण बंधन मंत्रोचार पूर्वक किया गया।राजेश पंचोलिया इंदौर। 
वात्सल्य वारिघि भक्त परिवार से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी।   

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