आचार्य श्री धर्मसागर जी निष्प्रही सन्त थे
आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी
मांगीतुंगी महाराष्ट्र
आचार्य श्री धर्म सागर जी निष्प्रही संत थे उन्हें भोले गुरुदेव कहा जाता था। मुनि अवस्था ही नही गृहस्थ अवस्था मे भी निष्प्रही श्रावक रहे। यह उदगार पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी ने धर्म शिरोमणि आचार्य श्री धर्म सागर जी के 54 वे आचार्य पदारोहण अवसर पर आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम में आचार्य श्री धर्म सागर विधान में कहे।

विधान के सौधर्म इंद्र श्री आशीष जी जयपुरिया परिवार सीकर रहे।
वही दीक्षा गुरु के विधान के प्रत्येक अर्थ की विवेचना कर गुणानुवाद किया गया।
इसके पूर्व प्रथमाचार्य आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज सहित सभी पूर्वाचार्यो को अर्घ अर्पित किए गए।
फ़ागुन शुक्ला अष्टमी को सिद्ध क्षेत्र श्री मांगीतुंगी जी मे दोपहर को आचार्य श्री धर्म सागर जी का 54 वा आचार्य पदारोहण तथा पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि राष्ट्र गौरव आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी का 54 वा संयम वर्ष वर्द्धन दिवस मनाया जावेगा। इस अवसर पर महाराष्ट्र कर्नाटक राजस्थान देहली पश्चिम बंगाल उत्तर प्रदेश मध्यप्रदेश तमिलनाडु पांडिचेरी छत्तीसगढ़ गुजरात सहित अनेक राज्यो से भक्त पधार रहे है। उल्लेखनीय है की वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज ससंघ का विहार श्री अतिशय क्षेत्र श्री महावीर जी के लिए चल रहा है। वहाँ पर 24 वर्षो पश्चात श्री महावीर स्वामी का महामस्तकाभिषेक आचार्य श्री के प्रमुख सानिध्य एवम मार्गदर्शन में होगा। वही मांगीतुंगी में अनेक राज्यो के भक्तों द्वारा अपने नगरों में आचार्य श्री को संघ सहित पधारने हेतु श्रीफल अर्पित किए जा रहे है।
इस अवसर पर श्री मांगीतुंगी मंदिर समिति ओर श्री रिषभदेवपुरम कमेटी द्वारा आगुन्तक अतिथियों के आवास की समुचित व्यवस्था की गई है।
राजेश पंचोलिया इंदौर
वात्सल्य वारिधि भक्त परिवार से प्राप्त जानकारी
संकलंन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी
