बूंदी जिले में हजारों साल पुराने जैन स्तंभों की खोज जैन समाज को करती है गौरवान्वित

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बूंदी जिले में हजारों साल पुराने जैन स्तंभों की खोज जैन समाज को करती है गौरवान्वित
बूंदी
यूं तो जैन विरासत देश के चप्पे-चप्पे पर है और समय समय पर ज़मीन की खुदाई में जैन तीर्थंकरों की मूर्तियां निकलकर जैन संस्कृति के प्राचीन होने की गवाही देते रहते हैं।
हाल ही में फिर एक बार ऐसी ही खोज हुई है जो जैन समाज को गौरवान्वित करने वाली है।

 

 

राजस्थान के बूंदी जिले से 65 किमी दूर नैनवां गांव के तालाब के पास एक छोटी पहाड़ी पर अलग-अलग संवत् के आठ निषिद्ध स्तंभ एक ही लाइन में बने हुए मिले हैं। 
ये स्तंभ संवत् 1000 से 1500 के समय के हैं । शायद बहुत सी पीढ़ियों के परिवार जनों ने जैन मुनियों की समाधि की स्मृति में अलग अलग काल में इन्हें बनवाया है। इन सभी स्तंभों पर जैन तीर्थंकरों की मूर्तियां बनी हुई हैं और इन सबमें सबसे बड़ा स्तंभ आठ फीट तक का है।

 

 

 

यह दुर्लभ खोज की है राजस्थान के प्रसिद्ध आर्कियोलॉजिस्ट कुक्की ओमप्रकाश ने जो पहले भी नयी नयी खोजें कर और हजारों पुरातात्विक अवशेष ढूंढकर दिल्ली, राजस्थान और बूंदी के म्यूज़ियम को। 
अनमोल सौगातें दे चुके हैं और पुरातात्विक क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखते हैं। विश्व की सबसे लंबी रॉक पेंटिंग ढूंढने का श्रेय भी इन्हीं को जाता है।

 

 

 

लेकिन इस खोज के बाद अब जरूरी है कि बूंदी और नैनवां का स्थानीय समाज अपनी इस धरोहर को बचाने के लिए आगे आए।
इससे पहले भी झालरापाटन में एक पहाड़ी पर 2014 में इसी तरह के स्तंभ पता चले थे जिन्हें वहां के स्थानीय जैन समाज ने पहाड़ी के उस क्षेत्र को अपने अधिकार में ले लिया था। 
विदित हो कि राजस्थान के हाड़ौती, वागड़, ढूंढाण क्षेत्रों में 1000 वर्ष प्राचीन इस तरह के स्तंभ विशेष रूप से मिलते हैं।

स्वाती जैन हैदराबाद से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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