अतिशय क्षेत्र बंधाजी में आयिॅका संघ कापिच्छिका परिवर्तन कार्यक्रम हुआ संपन्न।

धर्म

अतिशय क्षेत्र बंधाजी में आयिॅका संघ कापिच्छिका परिवर्तन कार्यक्रम हुआ संपन्न।
बंधाजी
बुंदेलखंड के अति प्राचीन अतिशय क्षेत्र बंधा जी में रविवार को पिच्छिका परिवर्तन एवं आचार्य विद्यासागर जी महाराज का 52 व आचार्य पदारोहण दिवस का कार्यक्रम बड़े ही धूमधाम एवं धार्मिक कार्यक्रमों के साथ संपन्न हुआ।

 

प्रदीप जैन बम्हौरी ने बताया कि बंधा जी में प्रातः काल से ही भक्तों का आना शुरू हो गया था प्रातः 8:30 बजे श्री जी का अभिषेक शांति धारा संपन्न हुई। दोपहर 2बजे से पिच्छिका परिवर्तन का कार्यक्रम शुरू हुआ।माताजी के ग्रहस्थ जीवन के परिजनो को आचार्य विद्यासागर जी समय सागर जी महाराज के चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन करने का सौभाग्यप्राप्त हुआ। मंगलाचरण के पश्चात्‌ विद्यासागर महाराज की पूजन सम्पन्न हुई। आचार्य श्री पूजन में सभी नगरों एवं गांव से आए लोगों को आचार्य श्री की पूजन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ ।

अकंपमति माताजी ने अपने प्रवचनों में बताया कि समय अपनी गति के साथ बढ़ता जा रहा है हम सभी आज आचार्य भगवन विद्यासागर जी का 52 वा आचार्य पदारोहण दिवस में मनाने का अवसर हम लोगों को मिल रहा है। माताजी ने कहा कि आचार्य श्री ऐसे कल्पवृक्ष थे जो उनकी छाया में खड़ा होता था आचार्य श्री दोनों हाथों से आशीर्वाद देते थे।

आज हमारा चातुर्मास का निष्ठापन एवं पिच्छिका परिवर्तन का कार्यक्रम आप लोगों के समक्ष हो रहा है ।दीक्षा के समय आयिॅकाओ को संयम के उपकरण रूपी पिच्छिका को जीव दया के पालन हेतु आचार्य श्री अपने दीक्षित शिष्यों को प्रदान करते हैं।
चातुर्मास के समापन के बाद जैन मुनियों एवं आयिॅकाओं को श्रावको द्वारा मोर पंख से बनी हुई पिच्छिका प्रदान की जाती है। पिच्छिका लेने एवं देने वाले श्रावक को कुछ विशेष नियमों का पालन करना होता है ।माताजी ने कहा कि अपने जीवन में संयम का महत्व समझने वाले श्रावक ही इस संयम रूपी उपकरण को ले पाते हैं एवं आयिॅकाओ एवं मुनिराजो को अपने हाथों से देने का सौभाग्य प्राप्त कर पाते हैं।

 

आयिॅका अकम्पमति माता जी ने कहा कि पिच्छिका मे पांच गुण होते हैं यह धूल को ग्रहण नहीं करती, पसीने को भी ग्रहण नहीं करती ,इसमें मृदुता एवं कोमलता होती है, पिच्छिका हल्के वजन की होती है। यह पसीने को धूल और रज को ग्रहण न करने से सदैव सभी वस्तु का प्रतिलेखन बन जाता है ।इसका स्पर्श बहुत ही सुकोमल है। मयूर पंख को नेत्र मे घुमाने पर भी बाधा नहीं होती। इस संयम रूपी उपकरण के द्वारा दिगंबर मुनि महाराज एवं आयिॅका माताजी जीव दया का पालन करते हैं।

 

कार्यक्रम में टीकमगढ़ ललितपुर सागर बंडा नागपुर सहित अनेक शहरों एवं निकटवर्ती समाज के लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बंधाजी ट्रस्ट एवं प्रबंध कार्यकारिणी कमेटी के अनोज जैन, कमलेश जैन, महेंद्र जैन सिमरा, राजेंद्र जैन बल्ले राजेंद्र मोदी प्रदीप जैन बम्हौरी ,अजित जैन ,महेंद्र जैन बंधा सहित सभी पदाधिकारी शामिल रहे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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