आर्यिका श्री महायशमति माताजी ने जैन धर्मशाला भवन में केश लोचन किया ।
पारसोलाआचार्य श्री 108वर्धमान सागर जी। महाराज की संघस्थ आर्यिका 105श्री महायशमति माताजी ने अपना केशलोचन किया ।केशलोचन के बारे में संघ की आर्यिका105 श्री वत्सलमति माताजी ने चर्चा में बताया कि प्रत्येक दिगंबर साधु को 2 माह से 4 माह की अवधि के भीतर के केशलोचन करना अनिवार्य है केशलोच दिगंबर साधु का मूलगुण है । केशलोचन के माध्यम से शरीर से राग और मोह दूर होता है केशलोचन की प्रक्रिया में आर्यिका माताजी ने बताया कि केश्लोचन करते समय केवल राख का उपयोग किया जाता है माताजी श्री ने बताया कि जैन धर्म अहिंसा प्रधान धर्म है बालों का लोचन अगर नहीं किए जाएं तो उसमें छोटे-छोटे जीवो की उत्पत्ति होने की संभावना होती है जैन साधु अहिंसा धर्म के महाव्रती होते हैं। बाल हाथों से इसलिए उखाड़े जाते हैं कि बालों को कटिंग करने के लिए सेविंग कराने के लिए अन्य द्रव्य की आवश्यकता होती है जैन साधु अपरिग्रही होते हैं। इसलिए जैन साधु अपने हाथ से केशलोचन करते हैं बाल सौंदर्य का प्रतीक हैं इससे राग और आकर्षण होता है। केश लोच से शरीर से ममत्व दूर होता है केश लोचन के समय तप,संयम, धैर्य के साथ धर्म की प्रभावना होती है जिस दिन जैन साधु केशलोच करते हैं उस दिन उपवास करते हैं ।केश लोचन देखकर अनुमोदना करने से पुण्य की प्राप्ति होती है कर्मों की निर्जरा होती है। इस अवसर अनेक महिलाओ ने वैराग्य पूर्ण भजन गा कर केशलोचन की तपस्या की अनुमोदना कीराजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
