“जिन पूजन से सुख शांति समृद्धि और धर्म की प्राप्ति होगीआचार्य श्री वर्धमान सागर जी

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“जिन पूजन से सुख शांति समृद्धि और धर्म की प्राप्ति होगीआचार्य श्री वर्धमान सागर जी

पारसोला पंचम पट्टाघीश वात्सल्य वारिघी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सानिध्य में दिगंबर जैन दशा हूंमड समाज द्वारा सर्वतोभद्र विधान की महापूजन स्थानीय श्यामा वाटिका में प्रतिष्ठाचार्य कीर्तिश पंडित अशोक पंडित के निर्देशन में ऋषभ धनपाल चंदावत सपरिवार सौधर्म इन्द्र, श्रीमती तारा देवी सेठी कोलकता ,श्रीमती आरती सनत जैन इंदौर चक्रवर्ती परिवार तथा शताधिक इंद्र परिवारों द्वारा श्रीजी के पंचामृत अभिषेक ,शांति घारा के पश्चात रजत द्रव्यों, मिष्ठान,श्रीफल, विभिन्न सेवफल,अनार, मौसंबी, केला ,सुखे मेवे काजु ,बादाम, अखरोट, किसमिस,, चारोली द्वारा मंडल पूजन की जा रही है । जयंतीलाल कोठारी अध्यक्ष जैन समाज,ऋषभ पचौरी अध्यक्ष वर्षायोग समिति अनुसार प्रारंभ के दिनों में त्रिलोकक्य जिनालयों भवनवासी,असुर, नागकुमार , सुपर्ण , द्वीप कुमार,उदघि कुमार, स्तनित, विद्युत, दिक्कुमार अग्नि देवों के जिनालयों की पूजन की गई। ब्रह्मचारी गज्जू भैया राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने विधान के अवसर पर विधान पर समर्पित किए जाने वाले अर्घ्य का वाचन कर उनका महत्व बताते हुए धर्म देशना में बताया कि सर्वतोभद्र विधान के अंतर्गत इस मंगल बेला में तीन लोक के अरिहंत सिद्ध, आचार्य ,उपाध्याय, साधु सहित नव देवताओं की , भगवान की पूजन कर रहे है। तीनों लोकों की 170 कर्म भूमियो में 8 करोड़ 56 लाख से अधिक जिनालय में 108 प्रतिमाएं होती है इस अनुसार 925 करोड़ 53 लाख से अधिक प्रतिमाओं की आप पूजन कर रहे हैं ।इस बेला में हमें क्या चिंतन करना है भगवान जिनेन्द्र की यह अर्चना हमारे जीवन में सुख शांति और समृद्धि देने वाली है। और समृद्धि का अर्थ ज़रूर समझ लेना भौतिक समृद्धि से हमारा यह अभिप्राय नहीं है, भगवान जिनेन्द्र की पूजा करने वाला पूजक दुःखों का नाश करता है। सुख की प्राप्ति होती है) जीवन की आकुलताएँ समाप्त होती है, निराकुलताएं जितनी जितनी बढती चली जाती है, उतनी उसके जीवन में शांति स्थापित होती जाती है। और सुख और शांति से दुःखो का नाश और आकुलताओं का विनाश जब हो जाता है, तो आध्यात्मिक समृद्धि बढ़ती है, आत्मिक गुणों की वृद्धि होती है, और उन आत्मिक गुणों की वृद्धि से जीव आत्मा परमात्म पद की यात्रा के लिए अपना मार्ग प्रशस्त करता है। प्रतिदिन रात्रि को श्री जी की आरती के पश्चात शास्त्र प्रवचन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 

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