“अपने सुखों में आनन्द मनाना दुसरे के सुखो में रोना पाप है ” शाश्वत सागर जी महाराज

धर्म

“अपने सुखों में आनन्द मनाना दुसरे के सुखो में रोना पाप है ” शाश्वत सागर जी महाराज
कोटा :

दिनाक : 14 नवम्बर अष्टानिका महापर्व व श्री इन्द्रध्वज महामण्डल विधान के सातवे दिन नसिया जी जैन मंदिर दादाबाड़ी कोटा में पूज्य आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के शिष्य चतुर्थ कालीन चर्या धारक मुनि श्री 108 शाश्वत सागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि जीवन एक यात्रा है जीव को अन्त समय में ही पुण्य करने की याद आती है मनुष्य चाहे तो सुख-दुखो से उपर उठ सकता है सुख जितने भी है वो दुख ही है वास्तव में सुख अपने पास ही है हम सुख को दुसरे पदार्थों में खोजते हैं सभी बड़े आद‌मी तो बनना चाहता है पर भला कोई नहीं बनना चाहता है अपने दुख में रोना पाप है दुसरे के दुख में रोना पुण्य है इसी प्रकार अपने सुखों में आनन्द मनाना पाप है दुसरे के सुखो में रोना पाप है।

 

अध्यक्ष जम्बू जैन सर्राफ ने बताया कि कि इस अवसर पर शान्तिधारा व भक्तामर विधान महावीर सिद्धार्थ मित्तल परिवार राजेन्द्र हुकम काका परिवार, विवेक जी ठोरा परिवार द्वारा की गई निदेशक हुकम जैन काका ने बताया कि 108 इन्द्र-इंद्राणियों के द्वारा श्री इंद्रध्वज महामंडल, विधान में मानुषोत्तर मेरु स्थित पर्वत पूर्वदिक् स्थित जिनालय संबंधी 4 जिनालय की पूजा के माध्यम से नंदीश्वर द्वीप की चारों दिशाओं 13, 13 के हिसाब से 13 गुण 4 = कुल बावन जिनालय 52 द्वीप के माध्यम से इंद्र परिवारों द्वारा 56 आकर्षक ध्वजाये जिन चैत्यालयों पर चढ़ाई गईसंसारी जीव पूरा जीवन दुसरो के लिए जीता है स्वंय के लिए जीए तो कल्याण हो जाए मोह के कारण आत्मा में रुचि नहीं जग रही है पाप का फल नरक है पाप करोगे तो नर्क में जाना ही पड़ेगा रोटी कपडा मकान जीवन की आवश्यकता है परन्तु इसके अतिरिक्त जो भी संसार के अन्य साधन इकट्ठे कर रखे है वो पाप के ही कारण है फालतू में बिजली पंखा चलाना ये सब अनर्थ दण्ड में आएगा इसका पाप लगेगा जितना परिग्रह कम होगा उतना मन हल्का रहेगा वर्तमान में जीवन लोन पर चल रहा है जबकि सबसे बडा दुख कर्ज है कर्ज नहीं चुकने पर आद‌मी चिंता में व्यथीत होता रहता है संसारिक वस्तुओं से कभी सुख मिलने वाला नहीं संसार दुखों से भरा पड़ा है जन्म से ही दुख है सभी जीव रोते हुए ही आते है जीवन सुधारो समाधिमरण के नियम लेवो प्रतिदिन छः आवश्यक पालना अनिवार्य है आत्म कल्याण करो इसमें ही जीवन का कल्याण है और इसमें ही सुख है I

संयोजक धर्मचन्द धनोप्या ने बताया सायं आचार्य भक्ति,. जिज्ञासा समाधान,. महाराज श्री की आरती, श्री इंद्रध्वज महामंडल, विधान की सामूहिक, भक्तामर पाठ एवं भक्तामर महाआरती संगीत मय करवाई गई
प्रशासनिक मंत्री अर्चना जैन (रानी) सर्राफ के द्वारा “विवेक लगाओ ज्ञान बढ़ाओ प्रतियोगिता ” का आयोजन किया पुण्योदय क्षेत्र में ज्ञान की गंगा बह रही है एवम पुरस्कार वितरण चन्दन बाला बाबरिया द्वारा किया गया। महाराज श्री को अर्चना दुगेरिया ने शास्त्र भेट कियाकोषाध्यक्ष मनीष जैन मोहिवाल ने बताया कि इस अवसर पर प्रकाश हरसौरा, अशोक जिन्दल , पंकज कंसल, चन्द्र प्रकाश सरवाडिया, हुकम–हर्षा जी,हितेष सोगानी, सरिता शाह, नमिता बरमुंडा, कल्याणमल पंडितजी, पदम जैन सेल्स टैक्स, शकुन्तला दुगेरिया, और कार्यकारणी व महिला मण्डल की अनेक महिलाये समाज जन उपस्थित थे।

अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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