कुछ लिख कर सो, कुछ पढ़कर सो,जब सोकर उठो तो चार कदम आगे बढ़कर उठो..!आचार्य प्रसन्नसागर जी
अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज कुलचाराम से बद्रीनाथ अहिंसा संस्कार पदयात्रा के अंतर्गत अपनी मंगल वाणी में कहाकीकुछ लिख कर सो, कुछ पढ़कर सो,जब सोकर उठो तो चार कदम आगे बढ़कर उठो..!
उन्होंने कहा आज मैं देख रहा हूं – कि शिक्षा पूरी होने के बाद हमारा पुस्तकों से रिश्ता खत्म सा हो जाता है। शायद पढ़ने वाले सोचते हैं कि अब पुस्तकों से क्या काम-? लेकिन यह गलत फ़हमी है उनकी, जो यह सोच रहे हैं।







पुस्तकें केवल डिग्री मिलने तक की साथी नहीं है, ना धन्धा पैसा बटोरने के उपाय। बल्कि साहित्य-हमारे अभिभावक की भूमिका निभाते हैं।
गुरू की तरह दिशा बोध देते हैं।
डाॅक्टर, वैध, हकीम की अहमियत रखता है। मित्र की तरह सही गलत की बात बताता है।यदि हम नित्य अच्छे विचार के, लेखकों के, चिन्तकों के, महापुरूषों के, साहित्य को पढ़ते हैं, तो जीवन में जरूर परिवर्तन आयेगा। जो कार्य डाॅक्टर, वैध, हकीम, माता पिता, शिक्षक नहीं कर पाते वह कार्य अच्छा साहित्य कर देता है। मनोभाव से पढ़ा गया साहित्य हमें अनेक विकल्पों से, चिन्ताओं से, तनावों से मुक्त कर सकता है।
उन्होंने कहा आप रोज मात्र 7 से 10 मिनट या एक पेज पढ़ते हैं तो मानकर चलना आप कभी डिप्रेशन के शिकार नहीं हो सकते। इसलिए –साहित्य पढ़ने की आदत डालिये और शरीर से स्वस्थ व मन से प्रसन्न होकर जीयें…!!!। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
