पीछी जैन साधु का ब्रह्मास्त्र हैआचार्य गुप्तिनंदी

धर्म

पीछी जैन साधु का ब्रह्मास्त्र हैआचार्य गुप्तिनंदी
धर्मतीर्थ
श्री धर्मतीर्थ क्षेत्र पर परम पूज्य प्रज्ञायोगी दिगम्बर जैनाचार्य श्री गुप्तिनन्दी गुरुदेव ससंघ का भव्य पीछी परिवर्तन, वर्षायोग मंगल कलश निष्ठापन, एवं दीक्षार्थियों का अभिनंदन गोदभराई महोत्सव धूमधाम से सम्पन्न हुआ सर्वप्रथम ब्र.अलका दीदी व ब्र.जनक दीदी के द्वारा मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया।तदुपरांत चारों दीक्षार्थी, मुख्य कलश व पीछी प्रदानकर्त्ता और महाप्रसादी वाहन सौजन्य दाता परिवारों के द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया । नागपुर, छ.संभाजीनगर, इंदौर, पाचोड गेवराई, बीड अडूल, लासुर स्टेशन से आये भक्तों ने प्रभु व गुरुचरणों में पुष्पांजलि अर्पित की और अपने अपने शहर में आचार्य श्री संघ को आने का निमंत्रण दिया। इस अवसर पर आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य दीक्षार्थी ब्र. निर्मल भैया, ब्र. अनुपम भैया, ब्र.अलका दीदी, ब्र.जनक दीदी ने प्राप्त किया ।आचार्य श्री की पूजन चारों दीक्षार्थी के साथ लासुर स्टेशन महिला मंडल ने बडे धूमधाम से संपन्न की ।आचार्य श्री को पीछी भेंट करने का सौभाग्य श्रीमती प्रेमलता माणकचंद, श्री महेश नमिता, दर्पक हार्दिक परिवार रामगंजमंडी को प्राप्त हुआ ।कमण्डल भेंट श्री सुमेरचंद राजकुमारी, अतुल वर्षा जैन(नागौर) परिवार ने किया ।वहीं शास्त्र भेंट श्री संजय सीमा गोम्मटेश खबडे परिवार देवलगाँवराजा और माला भेंट श्री कपिल ज्योति जैन कोटा ने किया। चातुर्मास का प्रमुख मंगल कलश लेने का सौभाग्य श्री विजेन्दर श्रीमती निर्मल, आदित्य, जितेंद्र शीतल मनोज जैन परिवार गुरुग्राम को प्राप्त हुआ ।धर्मतीर्थ कलश क्षेत्र के महामंत्री वास्तु शास्त्री श्री पवनकुमार सौ.सुरेखा, संजोग शिप्रा, मीत मिताली पापडीवाल परिवार छ.संभाजीनगर ने प्राप्त किया ।महालक्ष्मी कलश सौ रेखा प्रमोदकुमार अग्रवाल परिवार बाराबंकी परिवार, गुरुसेवा कलश क्षेत्र के उपाध्यक्ष वास्तु विद श्री राजेन्द्र-सौ.वंदना, भूषण प्रिया, नव्या दर्श पाटनी परिवार ने व इनके साथ और भी अनेक परिवारों ने अनेक प्रकार के मंगल कलश प्राप्त किए ।मुनि श्री विमलगुप्तजी को पीछी श्री प्रदीप जैन परिवार नी प्रदान की।गणिनी आर्यिका श्री आस्थाश्री माताजी को पीछी सौ श्रद्धा गणेश परिवार ने प्रदान की ।क्षुल्लक श्री शांतिगुप्त जी को श्री अनिल ज्योति जैन परिवार इंदौर ने पीछी भेंट की। जालना से श्री रमेश सौ.सुमित्रा, आशीष अर्चना, अमर प्रिया, अमोल मोनिका साहुजी नेमिराज जैन परिवार ने क्षुल्लिका धन्यश्री माताजी को पीछी प्रदान की। इसके अलावा अन्य अनेकों भक्त परिवारों के द्वारा संघस्थ मुनि, आर्यिका, क्षुल्लक, क्षुल्लिका व त्यागी जनों शास्त्र कमंडल व वस्त्र प्रदान किए गए ।इस अवसर पर श्री नन्दलाल सौ.शकुंतला, राजेन्द्र सन्मति, नीलेश अर्पिता, कु.रितिका, नैना, आस्था, वंश,अर्णव ठोले परिवार आस्था कैटरर्स ने महाप्रसादी का आयोजन किया । वाहन सौजन्य श्री पारस नीता पांडे परिवार देवगांव रंगारी ने प्रदान किया।मंच संचालन धर्मतीर्थ विकास समिति के प्रवक्ता श्री नितिन नखाते नागपुर व सिद्धचक्र विधान के सौधर्म इंद्र अरुण पाटनी जी ने किया ।मंच पर आचार्य श्री के साथ,मुनि श्री विमलगुप्तजी, गणिनी आर्यिका श्री आस्थाश्री माताजी, क्षुल्लक शान्तिगुप्त जी,क्षुल्लिका धन्यश्री, क्षुल्लिका तीर्थश्री,ब्र.निर्मल भैया, ब्र.अनुपम भैया, ब्र.अलका दीदी,ब्र जनक दीदी आदि विराजमान थे ।इस अवसर पर श्री शेखर धनावत, अनिल गोधा, श्री सुनील पाटनी, ललित पाटनी, नितिन नखाते, त्र्यम्बक तुपे, जितेन्द्र पहाडे, नवीन पाटनी, दिलीप शिवणकर, प्रमोद राखे, राजेश जैन, विलास आग्रेकर आदि अनेकों गणमान्य भक्तों का धर्मतीर्थ क्षेत्र की ओर से विशेष स्वागत किया गया।

 

 

इस अवसर पर अपनी मङ्गल वाणी में पीछी व कलश का महत्व समझाते हुए आचार्य ने कहा मंगल कलश में सम्पूर्ण चातुर्मासिक साधना सार समाहित होता है।मंगल कलश जिस घर में विराजमान होता है वहाँ सदा मंगल ही मंगल होता है ।पीछी जैन साधु का ब्रह्मास्त्र है ।जैसे कोई योद्धा ब्रह्मास्त्र से सभी शत्रुओं को जीत लेता है वैसे ही पीछी रूपी ब्रह्मास्त्र से जैन साधक कर्म रूपी शत्रुओं पर विजय प्राप्त करते हैं ।पीछी के बिना जैन मुनि व आर्यिका सात कदम से आगे नहीं जा सकते । जैन मुनियों के हाथ की पीछी हर एक श्रावक के घर में होना चाहिये ।हमें यह कामना करना चाहिए कि जब भी अपने जीवन का अंत हो उससे पहले मन सन्त हो ।घर में रखी पीछी गुरु की याद दिलाती है ।जो सदा गुरु को याद करता है उसके ही मन में दया समाती है । घर में रखी पीछी अनेक अमंगल दूर करती है ।पीछी अपने घर के ईशान कोण में काँच के बाक्स में रखना चाहिए ।कलश निष्ठापन व पीछी परिवर्तन के इस महोत्सव में गुरुसंघ का आशीर्वाद पाने हेतु छ.संभाजीनगर,नागपुर,इंदौर, बाराबंकी, दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, फलटण, कचनेर, पैठण, ढोरकिन, जालना, देवलगाँवराजा, अडूल, अम्बड़, बीड, पाँचोड, गेवराई कन्नड़ नासिक धुले ,लासुर स्टेशन,सहित सम्पूर्ण मराठवाड़ा, विदर्भ, खानदेश व दिल्ली, बड़ौत, रोहतक, फरीदाबाद, पानीपत हरियाणा उत्तरप्रदेश के अनेकों भक्त उपस्थित थे ।

 


इस महोत्सव को सफल बनाने में अध्यक्ष श्री चन्द्रशेखर पाटनी के साथ, मार्गदर्शक श्री सुनील जी काला, महामंत्री श्री पवनकुमार पापडीवाल, उपाध्यक्ष श्री राजेन्द्र पाटनी,गुलाबचंद कासलीवाल, धीरज पाटनी,नितिन गांधी, नितिन नखाते,राजेश जैन केबल,आनन्द जैन रमणलाल साहुजी आदि भक्तों समिति के सदस्यों ने विशेष परिश्रम किया।इस अवसर पर आचार्य श्री ने धर्मतीर्थ विकास समिति के उपस्थित सभी सदस्यों को व अन्य भक्तों को विशेष आशीर्वाद दिया।

 

धर्मतीर्थ विकास समिति के अध्यक्ष आर्किटेक्ट श्री चन्द्रशेखर पाटनी ने सभा के अंत मे सभी का आभार व्यक्त किया । धर्मतीर्थ के प्रवक्ता श्री नितिन नखाते ने बताया-आचार्य श्री गुप्तिनंदी जी गुरुदेव ससंघ का अगले रविवार 17नवंबर को धर्मतीर्थ क्षेत्र से नवग्रह तीर्थ वरूर की ओर विहार होगा।जहाँ आचार्य श्री 19 जनवरी को वरुर के ऐतिहासिक पँचकल्याणक में ब्र.निर्मल भैया को मुनिदीक्षा प्रदान करेंगे। राष्ट्र संत आचार्य श्री गुणधरनंदीजी के सान्निध्य में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय स्तर के पँचकल्याणक में जगद्गुरू भारत गौरव गणाधिपति गणधराचार्य श्री कुन्थुसागरजी गुरुदेव के और उनके शिष्य आचार्य संघों के एकसाथ दर्शन मिलेंगे।हम सभी भक्त मिलकर आचार्य श्री का धर्मतीर्थ से नवग्रह तीर्थ का विहार धूमधाम से करायेंगे।

नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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