43 वर्ष की उम्र में संगीता ने आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के प्रथम बार दर्शन

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43 वर्ष की उम्र में संगीता ने आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के प्रथम बार दर्शन
टोंक राजस्थान में रहनी वाली संगीता बिलासपुरिया ने 43 वर्ष की उम्र में प्रथम बार जब आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के दर्शन किये वह अनुभव उन्होनें सांझा किया उन्होंने बताया हम टोंक से बड़े ही उत्साह पूर्वक बड़े बाबा व छोटे बाबा के दर्शन के लिए कुण्डलपुर महामस्तकाभिषेक में पहुंचे। और जैसे ही कुण्डल पुर पहुंचे तो पूर्णमति माताजी ससंघ के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। वो विहार के लिए निकलने वाले ही थे और लगभग पांच मिनट बाद ही एक और आर्यिका संघ का विहार हुआ,,,,पर कुछ समझ नहीं आ रहा था ,,,,,क्या करे। मन मे बस बड़े बाबा व छोटे बाबा के दर्शन की उमंग थी।


हमें कमरा मिलने में थोड़ा समय लगा तो हम दैनिक क्रियाओं के लिए गेस्ट रूम में चले गए, और पांच मिनट बाद शोर हुआ कि आचार्य श्री का विहार हो गया।,,,मन में उदासी सी आ गयी। सभी लोग हम उनके पीछे दौड़े,,,,कुण्डल पुर तीर्थ में सन्नाटा सा छा गया जैसे सबकुछ उनके पीछे ही
हमारे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें आचार्य श्री के साथ जाए या बड़े बाबा के दर्शन करें पहले,,,,???
दर्शन दोनों के ही करने थे,,, इसलिए हम सभी ने पहले बड़े बाबा की पैदल यात्रा करते हुए बच्चों ने बड़ों ने महामस्तकाभिषेक किया ,,,, क्या प्रतिमा थी बस वहां बैठे ही रहो और एक टक निहारते रहो। लगभग एक डेढ़ घंटे भक्ती करके शेष वंदना के लिए निकल हम आगे बढ़ गये।
उन्होंने बताया शाम का समय था मुनि पुंगव सुधासागर जी महाराज आचार्य श्री को विहार कराकर कुण्डल पुर पहुंचे। ,,,हमें सुबह से उनके भी दर्शन नहीं हुए तो हम लगभग पांच साढ़े पांच बजे शाम को कमरे पर दर्शन के लिए गए तो महाराज जी के गेट बंद हो चुके थे। फिर मन में निराशा सी आ गयी। ,,,पर हमारा पुण्य बहुत प्रबल था हम जैसे ही जाने लगे गेट खुला ,,,हमने अंदर जो युवा थे उनको बोला हमें महाराज जी के दर्शन करने है आप थोड़ा साइड हो जा हमने महाराज जी को नमोस्तु किया और बोला महाराज जी हम टोंक से है तो महाराज जी ने हाथ उठाकर आशीर्वाद दिया। मन गदगद हो गया। फिर बड़े बाबा की आरती में हम सभी सम्मिलित हुए।
दूसरे दिन छोटे बाबा के किये दर्शन
दूसरे दिन प्रातःकाल की बेला में सर्वप्रथम बड़े बाबा के दर्शन किए और फिर छोटे बाबा के दर्शन के निकल पड़े,,,,जिनका कुम्हारी से विहार पिपरिया घाट के लिए होना था,,,
लगभग पिपरिया घाट दो किलोमीटर की दूरी पर आचार्य श्री थे,,,
हम आचार्य श्री के एक किलोमीटर दूर पहले से जाकर खड़े हो गए दर्शन को लालायित थे जिंदगी में पहली बार दर्शन होने वाले थे।
दर्शन कर मन भावुक
संगीता बताती है की जैसे ही आचार्य श्री कुछ दूरी पर दिखने लगे स्वत : ही मस्तक नमन हो गया। जैसे जैसे आचार्य श्री समीप आते गए,,,मन भावुक होने लगा, और सड़क पर ही हाथ जोड़कर उनके चरणों में बैठ गई ,,,, जैसे ही बस जैसे ही पांच दस कदम की दुरी रही ,,, आचार्य श्री ने निगाह हमारे ऊपर डाली तो मन भर गया। जैसे साक्षात भगवान ने हमें निहारा हो,,,,वो उनकी एक निगाह देखना जैसे मेरा तो जीवन ही सफल हो गया।होना भी चाहिए। फिर हमने करीब एक किलोमीटर आचार्य श्री के साथ पिपरिया घाट के लिए विहार किया।
उन्होंने बताया की आचार्य श्री का स्वास्थ्य ठीक नहीं था,,,, फिर उनकी आहारचर्या देखी और आगे वंदना के लिए निकल पड़े। सभी फिर हमने रहली,,,बीना बारह, गढ़ाकोटा,,देवरी इत्यादि क्षेत्रों के दर्शन करते हुए दमोह पहुंचे।
संकलित अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी।

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