चार प्रकार के दान देनेऔर 24 परिग्रह कम करने का संदेश त्याग धर्म देता है।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज।       

धर्म

चार प्रकार के दान देनेऔर 24 परिग्रह कम करने का संदेश त्याग धर्म देता है।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज।   पारसोला नगर में चातुर्मास हेतु विराजित है। दशलक्षण धर्म में आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म की विवेचना करते हुए आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बताया कि धर्म के 10 अंग होते हैं जो उत्तम क्षमा से लेकर उत्तम ब्रह्मचर्य तक होते हैं आचार्य श्री ने बताया कि सभी धर्म त्याग की प्रधानता बताते हैं क्रोध का त्याग करने से उत्तम क्षमा, मान का त्याग करने से मारदव धर्म, माया का त्याग करने से आरजव धर्म ,लोभ का त्याग करने से शौच सुचिता,  इंद्रीय विषय का त्याग करने से संयम असत्य का त्याग करने से सत्य धर्म और तप से त्याग प्रकट होता है ।आचार्य श्री ने प्रवचन में बताया कि दान चार प्रकार का होता है आहार दान, ज्ञान दान,औषघि दान,और अभय दान होता है।24 प्रकार के परिग्रह के त्याग का  धर्म संदेश देता है ।साधु की नवधा भक्ति किस प्रकार करना चाहिए उसका भी आचार्य श्री ने धर्म सभा में विवेचन किया। चार कषाय का प्रमाद मनुष्य को श्रेष्ठ कार्य नहीं करने देते हैं। पांच इंद्रीय विषयों के भोग चार प्रकार की विकथा से समय नष्ट होता है कोई लाभ नहीं होता है निंद्रा नींद सबसे बड़ा प्रमाद है इस छोटी मृत्यु की भी संज्ञा दी गई है। प्रमाद ने सभी को धर्म से विमुख कर रखा है इस कारण सभी आत्मा का स्वभाव भूल रहे हैं शरीर को आत्मा समझ रहे हैं विषय भोग के कारण शरीर के प्रति ममत्व अधिक है आज का  धर्म त्याग धर्म का संदेश देता है।  अंतरंग और  बहिरंग परिग्रह जीवन के साथ लगे हैं जो दुख देते हैं क्षेत्र ,वास्तु ,हिरण , सुवर्ण ,दास दासी आदि  परिग्रह है। स्वयं का दूध पिलाने से ही बच्चों में संस्कार आते हैं मिथ्यात्व 7तत्वों को दूर  करता है।  राजेश पंचोलिया इंदौरअनुसार14 प्रकार के अंतरंग परिग्रह और 10 प्रकार के बाहय परिग्रह की आचार्य श्री ने प्रवचन में विस्तृत विवेचना की। घर में रखी वस्तुओं के प्रति आसक्ति और महत्व भाव नहीं होना चाहिए परिग्रह दुखदाई है जो शांति को नष्ट करता है त्याग से शांति मिलती है शासकीय छापा रेड पडने की आप चिंता करते हैं किंतु आत्मा पर  कर्मों ने छापा रेड कर रखा है उसकी चिंता आपको नहीं है। साधुओं को आहार दान किस प्रकार देना चाहिए नवधा भक्ति की पूरी विधि बताइ। दान दाता के सात प्रकार के गुण होते हैं जिसमें श्रद्धा ,तुष्टि ,संतोष ,भक्ति, विवेक ज्ञान आदि होते हैं दान भी जिन  मन्दिर  स्थापना, तीर्थ यात्रा, शास्त्र दान आदि में करना चाहिए आज का त्याग धर्म आसक्ति इंद्रीय विषय भोग कम करने का संदेश देता है ।आपको स्थावर जीवन से प्रेरणा लेना चाहिए कि वृक्ष बीज का दान करता है, नदी जल का त्याग करती है। जीवन की विकृति त्याग से दूर होती है नीति पूर्वक एकत्रित धन का ही दान देना चाहिए। आचार्य श्री की पूजन आर्यिका श्री महायशमति ने कराई। राजेश पंचोलिया वात्सल्य भक्त परिवार से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *