भिक्षा पात्र तो भरा जा सकता है, लेकिन इच्छा पात्र तो कुबेर भी नहींभर पाया..! प्रसन्नसागर महाराज

धर्म

भिक्षा पात्र तो भरा जा सकता है, लेकिन इच्छा पात्र तो कुबेर भी नहींभर पाया..! प्रसन्नसागर महाराज
कमारेड्डी
गणपति सच्चिदानंद आश्रम सिरसिल्ला रोड कमारेड्डी अपोजिट चैतन्य हाई स्कूल में अन्तर्मना आचार्य प्रसन्नसागरजी महाराज ने कहा कीभिक्षा पात्र तो भरा जा सकता है, लेकिन इच्छा पात्र तो कुबेर भी नहीं ब भर पाया..! उन्होंने कहा आदमी का मन इच्छित वस्तु मिल जाये तो खुश हो जाता है और ना मिले तो दु:खी हो जाता है। मन की अनूकूल-प्रतिकूल परिस्थिति ही हर्ष विषाद में कारण बन जाती है।

 

 

महाराज श्री ने कहा की संसार और संसार की सम्पत्ति का मालिक आज तक कोई भी नहीं बन पाया। जिसने मालिक बनने की कोशिश की वो समय से पहले ही परमात्मा को प्यारा हो जाता है। यदि मन के न मुताबिक काम हो गया तो मन आनंद से झूम जाता है, और मन मुताबिक काम नहीं हुआ तो मन दुःख, शोक, चिन्ता, उद्वेग से भर जाता है। जिस प्रकार बैंक में कार्य करने वाले कर्मी दिन भर लाखों करोड़ो नोट गिनता है परन्तु उसके प्रति कोई आसक्ति नहीं रखता। क्योंकि वह जानता है कि यह संपत्ति तो बैंक की है। यदि हम आप भी यही सोचकर जीवन जीयें तो कभी दु:खी परेशान नहीं हो पायेंगे। कार्य की अनुकूलता सुख है और कार्य प्रतिकूलता दुःख है। दुःख तब होता है जब हम कूछ करने की कोशिश करते हैं और वह नहीं हो पाता तो मन दु:खी हो जाता है।

 

हमारा सुख – दुःख – पर वस्तु के राग, द्वेष और विकारी भाव से है। संसार की सामग्री, संसार की सेवा के लिये मिली है। इसलिए निर्विकार होकर वीतराग भाव से जीयें…!!!। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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