मनुष्य में ही वह कला, क्षमता, शक्ति है कि वह भगवान बन सकता है-आर्यिका श्री 105 विशाश्री माताजी
बड़नगर। चातुर्मास में यह मत सोचना की बहुत समय है। चातुर्मास का एक-एक पल कीमती होता है, एक भी दिन व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। चातुर्मास का समय ऐसे ही निकल जाएगा और माताजी का गमन हो जाएगा। हमारा गमन तो रुक कर के भी नहीं रुकता, हमारा गमन तो चल ही रहा है। कल पैरों का गमन चल रहा था, अब हाथ, मन एवं पढ़ने-लिखने का गमन चलेगा और ज्यादा चलेगा लेकिन हानि आपको होगी। यह अवसर था निकल जाएगा और आपको कुछ नहीं मिलेगा खाली थे और खाली ही रह जाओगे। आप सुबह उठते है, नहाते है, तैयार होते है, मंदिर गए, अर्क चढ़ाया और आजीविका चलाने के लिए दुकान चले जाते है, यह तो पशु-पक्षी भी कर रहे हैं। बच्चों को अन्न दे रहे हैं, उनका पालन पोषण कर रहे हैं, रहने का भवन बनाते है, आजीविका करना सिखाते है। यही सब कर रहे हो तो पशु पक्षी तुमसे श्रेष्ठ है। जितनी उसके पास क्षमता है वह कर रहा है तुम्हारे पास तो क्षमता भगवान बनने की है। पशु के पास भगवान बनने की क्षमता नहीं है। मनुष्य में ही वह कला, क्षमता, शक्ति है कि वह भगवान बन सकता है।
यह बात गणाचार्य आचार्य 108 श्री विराग सागर महाराज की परम प्रभावक शिष्या प्रथम गणिनी आर्यिका श्री 105 विशाश्री माताजी ने सोमवार को स्वाध्याय भवन में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कही।
इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष अभय टोंग्या, अशोक गोधा, अजीत टोंग्या, सुशील गोधा, नरेंद्र जैन, नितेश गोधा, कैलाश शाह, रजत टोंग्या सहित बड़ी संख्या में समाज के महिलाएं पुरुष उपस्थित थे।
मनीष टोंग्या बड़नगर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
