अजमेर जयपुर से किशनगढ़ आने वाले लोग भी अब आचार्य विद्यासागर महाराज की संयम यात्रा को देख सकेंगे
किशनगढ़
अजमेर जयपुर से किशनगढ़ आने वाले लोग अब आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की संयम यात्रा को देख सकेंगे।
इसके लिए न्यू स्टेशन रोड तिराहे पर आचार्य विद्यासागर महाराज संयम कीर्ति स्तंभ स्थापित किया है। जिसका कार्य जल्द ही पूरा हो जाएगा। पूर्व में जयपुर रोड स्थित नया बस स्टैंड और किशनगढ़ एयरपोर्ट पर भी कीर्ति स्तंभ बनाया जा चुका है। अब बस, ट्रेन और प्लेन से सफर करने के दौरान आचार्य विद्यासागर की जीवनी से यात्री रूबरू हो सकेंगे। आचार्य विद्यासागर महाराज संयम कीर्ति स्तंभ में चारों ओर 24 चित्रों में आचार्य विद्यासागर की संयम यात्रा दिखाई गई है। चित्रों में आचार्य विद्यासागर
महाराज की दीक्षा, केशलोच, तपस्या सहित जीवन के विभिन्न पहलुओं को सफेद मार्बल पर उकेरा गया है। स्तंभ के चारों ओर छह छह चित्र उकेरे गए है। वहीं वह एक और पिच्छी दूसरी और मार्बल का कमंडल भी बनाया गया है। स्तंभ की ऊंचाई 21 फिट है। वही कमंडल व पिच्छी ढाई ढाई फीट के हैं। स्तंभ के पास पेड़ पौधे भी लगाए जाएंगे। आर फाउंडेशन की ओर से इसका निर्माण कराया जा रहा है।
सन 1968 में अजमेर में हुई थी दीक्षा



आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का जन्म 10 अक्टूबर 1946 को कर्नाटक के बेलगांव जिले के सदलगा में हुआ था। उनका नाम विद्याधर था। आचार्य ज्ञान सागर से 1968 में 22 वर्ष की आयु में अजमेर में मुनि दीक्षा ली थी। नवंबर में 1972 में आचार्य ज्ञान सागर ने उन्हें आचार्य पद दिया था। आचार्य विद्यासागर के माता-पिता ने भी दीक्षा ली थी। उनके पिता श्री मल्लप्पा दीक्षा लेकर मल्लीसागर बनें, उनकी माता श्रीमंती दीक्षा के बाद आर्यिका समयमति बनी।
तीनों ओर से आचार्य की संयम गाथा
आरके फाउंडेशन की ओर से आचार्य विद्यासागर की दीक्षा 50 वर्ष पूर्ण होने पर किशनगढ़ में नए बस स्टैंड के बाहर श्रीविद्यासागर संयम कीर्ति स्तंभ की स्थापना की गई थी। स्तंभ में भी आचार्य विद्यासागर महाराज के जीवन के विभिन्न पहलू दर्शाए गए है। एयरपोर्ट पर आचार्य विद्यासागर महाराज की जीवन यात्रा दिखाई देती है। किशनगढ़ एयरपोर्ट पर भी कीर्ति स्तंभ बनाया गया। अब रेलवे स्टेशन तिराहे पर भी आचार्य श्री की संयम यात्रा को लोग जान सकेंगे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
