आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षित 88 वर्षीय शिष्य मुनि श्री प्रशम सागर जी महाराज का सम्यक समाधिमरण
धरियावद। 
प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की अक्षुण्ण मूलबाल ब्रह्मचारी पट्टपरंपरा की पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज धर्मनगरी धरियावद में 53 साधुओं सहित विराजित हैं। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षित 88 वर्षीय मुनि श्री प्रशमसागर जी महाराज ने शरीर संयम साधना में बाधक होने के कारण 14 वर्ष के संयमी जीवन में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज से क्षमा याचना करते हुए मुनि श्री पुण्य सागर जी सहित समस्त मुनिराज ,आर्यिका माताजी ,भैया दीदी,परिजनों समाज से क्षमा याचना कर आचार्य संघ समक्ष चारों प्रकार के आहार का त्याग कर यम संलेखना धारण की
।17मार्च को दोपहर 2,50 को बजे पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के श्रीमुख से अरिहंत सिद्ध के निरंतर मंत्रोच्चार सुनते हुए बहुत ही निर्मल शांत उत्कृष्ट परिणाम सहित सभी साधूऔ के सानिध्य में समाधी मरण हो गया है।परम पूज्य मुनि श्री प्रशम सागर जी महाराज के पार्थिव देह कीविमान यात्रा डोला 17 मार्च 2025 को दोपहर 400 बजे रत्न त्रय भवन धरियावद से प्रारम्भ होकर रोड स्थित वैराग्य योग दर्शन समाधि स्थल पर अंतिम संस्कार की क्रिया हुई। जहां पर सौभाग्यशाली परिवारों द्वारा छपक मुनिराज के पार्थिव देह का पंचामृत अभिषेक उल्टे क्रम से किया गया। अग्नि संस्कार का सौभाग्य परिजनों को प्राप्त हुआ
एक परिचय भिंडर उदयपुर निवासी श्री चांदमल जी बोहरा का जन्म 6 दिसंबर 1937 को भिंडर राजस्थान में हुआ आप स्वर्गीय छगनलाल जी श्रीमती मैना बाई बोहरा के पुत्र हैं।
आपने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज से आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत वर्ष 2002 सम्मेदशिखरजी में लिया। आपने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज से आश्विन शुक्ल दशवीं 6 अक्टूबर 2011 गुरुवार को सम्मेद शिखर सिद्ध क्षेत्र में सीधे मुनि दीक्षा धारण की। राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
