सब दानों से श्रेष्ठ दान समय दान: उत्तम सागर महाराज
हटा
कुण्डलपुर महामहोत्सव के अंतर्गत पूज्य बड़े बाबा का महामस्त्काभिषेक प्रतिदिन कुण्डलपुर में हो रहा है। जिसमें प्रतिदिन देश के कोने-कोने से श्रद्धालु कुण्डलपुर तीर्थ आकर बड़े बाबा का अभिषेक कर पुण्य अर्जन कर रहे हैं।
संतो के विहार का क्रम जारी
वही कुण्डलपुर से मुनि संघ एवं आर्यिका संघ के पद विहार का क्रम लगातार जारी है। वही उप काशी कही जाने वाली हटा में भी प्रतिदिन मुनि संघों व आर्यिका संघो के आगमन से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।
हटा का दुर्लभ संयोग है अभयसागर महाराज
जानकारी देते हुए जय कुमार जैन ने बताया कि निर्यापक मुनिश्री अभय सागर जी महाराज ससंघ तीन मुनिराज नगर में ही बड़े जैन मंदिर में पूर्व से ही विराजित हैं। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर बड़ा मंदिर में आयोजित प्रवचन सभा में निर्यापक मुनिश्री अभय सागर जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि कुंडलपुर से जेष्ठ मुनिराज पद विहार करते हुए अन्य साधुओं के संग आपके नगर में आ गए। दुर्लभ संयोग है कि रविवार को आर्यिका संघ का बिहार हुआ तो एक और मुनि संघ का आगमन हो गया। मुनिश्री ने कहा कि आप लोग ऐसे स्थान पर हैं जहां साधुओं का आना जाना लगा रहता है। हटा काशी के नाम से प्रसिद्ध है। ज्ञान ध्यान का केंद्र पूर्व काल से है।सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर का रास्ता हटा के तीन तरफ से है। उनकी वंदना के लिए साधु निकलते रहते हैं। उपकाशी नगरी में ज्ञान प्राप्त करने का उद्यम होता रहता है। वह ज्ञान हमारे जीवन में जब विपरीत हो हम विचलित न होते हुए वहीं ज्ञान मोक्ष मार्ग के साधन हैं।
मुनिश्री उत्तम सागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि दान श्रेष्ठ है। सब दानों में श्रेष्ठतम दान समय कहा गया है। संसार में व्यक्ति गुरु चरणों में आकर शीतलता पा जाता है। संत सानिध्य से हम कर्मों का निर्जला कर सकते हैं। संत श्रेष्ठ ने कहा कि आप लोगों का पुण्य है जो आप प्रतिदिन साधु दर्शन पा रहे हैं। यह आपके पूर्व जन्मों का पुण्य है जो आप साधु सेवा कर पा रहे हैं।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी
