परम पूज्य विनीत सागर महाराज एवं चंद्रप्रभसागर महाराज का चातुर्मास तपाराधना का चातुर्मास।

धर्म

परम पूज्य विनीत सागर महाराज एवं चंद्रप्रभसागर महाराज का चातुर्मास तपाराधना का चातुर्मास।

वर्षा योग 2024 समापन हो चुका है। लेकिन एक ऐसा चातुर्मास जो सचमुच धर्म आराधना के साथ परम पूज्य विनीत सागर महाराज एवं चंद्रप्रभसागर महाराज का चातुर्मास तपाराधना का चातुर्मास
वर्षा योग 2024 समापन हो चुका है। एक ऐसा चातुर्मास जो धर्म आराधना के साथ तप आराधना का चातुर्मास हो गया है। जी हां हम बात करें तो आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज से दीक्षित दो सुंदर-सुंदर चेतन कृतियां परम पूज्य मुनि श्री 108 विनीत सागर महाराज एवं परम पूज्य मुनि श्री 108 चंद्रप्रभ सागर महाराज पंचम युग में चतुर्थ युग की चर्या का एक अनुपम उदाहरण देती है। जो सचमुच ज्ञान ध्यान तप में लीन रहते हैं एवं धर्म की महती प्रभावना कर रहे है। इनकी निर्मोहीता निष्प्रहता अपने आप में देखते हुए बनती है।

 

 

मुनि द्वय ने आध्यात्म शिरोमणि आचार्यश्री समयसागर जी महाराज के सान्निध्य में स्वर्णोदय तीर्थ, खजुराहो में वर्षा योग तो किया ही लेकिन जितने दिन वर्षा योग के हैं उसे आधे दिन तो उन्होंने व्रत उपवास एवं तपसाधना में ही व्यतीत किया

 

 

पूरेचातुर्मास में एक आहार – एक उपवास की साधना की गई ।_
विवरण
_पूज्य मुनिश्री विनीतसागर जी महाराज* के इस चातुर्मास में 50 आहार और 54 उपवास संपन्न हुए ।_एवम पूज्य मुनिश्री चंद्रप्रभसागर जी महाराज के इस चातुर्मास में 52 आहार और 52 उपवास संपन्न हुए ।_हम तो कहेंगे यह सचमुच तप आराधना का चातुर्मास है। बिरले हैं ऐसे संत। सचमुच पंचम युग में ऐसे दिव्य साधको के दर्शन एवं उनकी आशीष लेने का सौभाग्य हमें प्राप्त हो रहा है। ऐसी अलौकिक साधना का जितना वर्णन करेंगे कम होगा।

 

कवि लिखते हुए कहते हैं जो कामना की साधना से कोसों दूर हैं कहीं ना कहीं ऐसे संत भी जरूर हैं।
जो कामना की साधना को निष्काम करे है। कहीं ना कहीं ऐसे संत भी जरूर हैं। सचमुच हमारे निर्ग्रंथ संत स्वार्थ को त्याग कर कठिन तपस्या करते हैं। तपस्या के द्वारा ही कर्म की निर्जरा होती है। तप साधना से ही मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
ऐसे मुनिवर देखें, जाके राग द्वेष नहीं मन में।
ग्रीष्म ऋतु शिखर के ऊपर मगन रहे ध्यानन में
चातुर्मास तरुतल ठाड़े, बूंद सहे छिन छिन में ।
शीतमास दरिया के किनारे धीरज धारे ध्यानन में
एक गुरु को में नित्य प्रति ध्याऊं देत ढोक चरणनन में
सचमुच क्या खूब लिखाहै
हमारे संतो के विषय में
जो है प्रकाश पुंज वीतराग ज्ञान में
इंसानियत जगाई तुमने संविधान में
अवतार महावीर के हो वर्तमान में।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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