सदबुद्धि पुण्य के सहयोग से मिलती है प्रमाण सागर महाराज
इंदौर
जीवन में कुछ चीजें हमें सहज रुप से प्राप्त होती है,तो कुछ चीजें हमें किसी की कृपा अथवा पुरुषार्थ से मिलती है लेकिन “सदबुद्धि” पुण्य के सहयोग से ही मिलती है,उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने उदयनगर स्थित जैन मंदिर में व्यक्त किये।
मुनि श्री ने कहा “धन कन कंचन राजसुख, सबहि सुलभकर जान, दुर्लभ है संसार में एक जथारथ ज्ञान” गुरुओं के पास से

धन दौलत या कोई बाह्य सामग्री नहीं मिलती उनके पास जब भी जाओ तो उनसे उस “गुण वैभव” तथा “यथार्थज्ञान” को पाने के लिये जाना जो उनके पास है, जिससे आपको सदबुद्धि मिल सके,और आप भी अपने जीवन का कल्याण कर सको।
उन्होंने आचार्य गुरुदेव विद्यासागरजी महाराज के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुये कहा कि जो भी ज्ञान है,वह उनकी कृपा से ही प्राप्त है,आचार्य गुरूदेव हमेशा कहा करते थे “जिसने जन्म लिया उसका मरना निश्चित है,यह तय करना है कि, कैसे मरना है? मरना है तो मरजा,जीते जी कुछ कर जा अन्यथा कर्जा तो मत कर जा……
मुनि श्री ने कहा कि यह जीवन भी एक अवसर है, जो कि बीतता जा रहा है,और कब कैसे बीत जाऐगा यह आपको और हमें पता ही नहीं लगेगा जैसे चातुर्मास का शुभारंभ हुआ था और पता ही नहीं लगा कि कब समाप्त हो गया उन्होंने कहा कि जीवन के
किस मोड़ पर क्या घटना घट जाएगी यह कहा नहीं जा सकता, कही भी, कभी भी, कुछ भी, घटना घट सकती है, कोई घटना घटे और समय बीतने के पहले जो इसका लाभ उठा लेते है वही सदबुद्धि बाले कहलाते है। उन्होंने महात्मा बुद्ध का उदाहरण देते हुये कहा कि एक बूढ़े आदमी को देखकर तथा श्मशान में अर्थी को जाते देखकर उन्होंने लोगों से पूछा कि क्या सबको बूढ़ा होंना पड़ता है? और क्या सभी को मरना पड़ता है जबाब सुनकर उन्होंने अपने जीवन के यथार्थ को जान लिया और वह अपनी अर्थी उठने से पहले इस संसार को छोड़ तपस्या की एवं
बोधित्व को प्राप्त हुये।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
