छबड़ा नगर के अतिशय जैन शास्त्री ने मुनि श्री सुधा सागर महाराज के सानिध्य में समयसार ग्रंथ की परीक्षा में किया द्वितीय स्थान प्राप्त

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छबड़ा नगर के अतिशय जैन शास्त्री ने मुनि श्री सुधा सागर महाराज के सानिध्य में समयसार ग्रंथ की परीक्षा में किया द्वितीय स्थान प्राप्त
छबड़ा
राजस्थान प्रांत के हाडोती के छबड़ा कस्बे के युवा अतिशय जैन शास्त्री ने निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव 108 सुधा सागर महाराज के सानिध्य में 10 दिन भाग्योदय तीर्थ सागर में रहकर प्राकृत भाषा के ग्रंथ समयसार का अध्ययन किया एवं उनकी गाथाओं का कंठस्थ किया।

 

 

पूरे 10 दिन उन्होंने धर्म साधना में बिताते हुए गुरुदेव की आहारचर्या सेवा भक्ति में अपना तन मन धन समर्पित किया। जब पूज्य मुनि श्री ने शंका समाधान कार्यक्रम में समयसार की गाथाओं को बीच-बीच में से उनसे सुना तो उन्होंने मौखिक सुनाया और गुरुदेव ने उनकी लगन की भी तारीफ की।

लगभग 100 लड़कों ने यह परीक्षा दी और जब परीक्षा का परिणाम आया तो अतिशय ने सचमुच अतिशय कर दिखाया और लगभग 78% अंक लेकर द्वितीय स्थान प्राप्त किया जो निश्चित रूप से गौरवान्वित करने वाले पल कहे जा सकते हैं।
जब परिणाम घोषित हुआ और महाराज श्री के समक्ष उन्हें

 

बुलाया गया तो महाराज श्री ने मधुर मुस्कान के साथ आशीर्वाद देते हुए अपनी पिच्छिका लगाकर अतिशय को आशीर्वाद प्रदान किया और अतिशय को गुरुदेव के चरणों का पद प्रक्षालन का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ। महाराज श्री ने कहा कि खूब उन्नति करो और धर्म की प्रभावना करो। ऐसे महा संत का आशीर्वाद मिलने के बाद तो सचमुच जीवन नई ऊंचाइयों को छू जाता है। निश्चित रूप से यह गौरव के पल कहे जा सकते हैं।

 


छबड़ा नगर निवासी नीरज रोशनी सेठी के पुत्र एवं सुमत प्रकाश सेठी उर्मिला सेठी के पौत्र श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर में अध्यनरत हैं और शास्त्री द्वितीय वर्ष में अध्ययन कर रहे हैं। जब उनसे पूछा गया कि आपको इसका अध्ययन करने की प्रेरणा किससे मिली तो उन्होंने जवाब दिया कि मुझे यह प्रेरणा आज से कुछ वर्ष पूर्व मेरी माता श्री रोशनी सेठी ने दी।

 

आज के युवाओं के लिए अतिशय जैसे युवा एक प्रेरणादायक उदाहरण है। आज का युवा जहां हिंदी भी ढंग से नहीं पढ़ पाता है, और बोल पाता है ,विलासिताओं में अपना समय बिताता है, एवं धर्म संस्कृति से विमुख हो रहा है। ऐसे में अतिशय जैसे युवा एक उदाहरण बनकर सामने आते हैं , ऐसे युवाओं से सीख लेना चाहिए। कहा जाता है की पंचम काल में धर्म का रथ युवा ही खींचेंगे। उसी का एक अनुकरणीय उदाहरण अतिशय जैसे युवा बनते है।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्टर 9929747312

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