व्यर्थ की बातों में समय बर्बाद न करे
विज्ञमति माताजी
ग्वालियर
परम पूज्या प्रज्ञा पद्मनी आर्यिका105
विज्ञमति माताजी ने व्यर्थ विषयो में न पढ़ने की सीख देते हुए कहा की कितने जन्मों का पुण्य संचय हुआ उसके बाद यह मानव जीवन मिला है। इसकी अमूल्यता को समझे सासारिक विषयो में व्यर्थ न करें। समय हाथ से निकल जाने के बाद फिर वापिस नही आ पाता है। अपने जीवन को लक्ष्य बनाकर अग्रसर करो।

जानकारी सांझा करते हुए ललित जैन भारती ने बताया की माताजी ने मंत्रों के विषय मे बोलते हुए कहा की मंत्रों का उच्चारण वाणी तक सीमित नही है, इसका भावार्थ समझे।

जब तक हम इसे समझ नही पाएंगे तब तक तक अन्तरग भाव उत्पन्न नही हो पाएगा।इसका भाव समझाते हुए कहा की हम जैसी स्तुति पूजन व मंत्रों का उच्चारण कर रहे है वैसे ही भाव अन्तरंग में आए। तभी हम पूर्ण फल को पा सकते है।
कर्म सिद्धांत की व्याख्या
पूज्या माताजी ने कर्म सिद्धांत की व्याख्या करते हुए कहा की कर्म जब बंध जाते है तो हंसकर आते है। लेकिन कटने के वक्त रो रोकर कटते है।व्यक्ति पाप कर्म करके कुछ पलों के लिए आनंदित हो जाता है औऱ हँसता हँसता हुआ पाप कर्मों की fd बना लेता है। उसकी मैच्यौरटी का भुगतान दुख के रूप में प्राप्त होता है।
समाज के प्रवक्ता ललित जैन

ने अवगत कराया कि प्रतिदिन णमोकार महामंत्र अखंड पाठ में शामिल होने वालों की भीड़ उमड़ रही है। लगभग 800 से भक्तो ने इसमें भाग लिया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी
