राजस्थान के सबसे बडे भगवान की मुर्ति का तिलकदान  मुनिसुव्रतनाथ भगवान व वागड का सगाई का दस्‍तुर हुआ ——- सुधासागरजी महाराज ,नौगामा के सुखोदय तीर्थ नसियाजी में विराजमान होगी प्रतिमा

धर्म

राजस्थान के सबसे बडे भगवान की मुर्ति का तिलकदान 
मुनिसुव्रतनाथ भगवान व वागड का सगाई का दस्‍तुर हुआ ——- सुधासागरजी महाराज ,नौगामा के सुखोदय तीर्थ नसियाजी में विराजमान होगी प्रतिमा
नौगामा ।राजस्‍थान के सबसे बडे भगवान श्री मुनिसुव्रतनाथ की मुर्ति का सागर से रविवार को नौगामा के लिया विहार हुआ । शनि ग्रह अरिष्ट निवारक भगवान मुनिसुव्रतनाथ का भव्य मंदिर धर्म नगरी नौगामा में आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के आशीर्वाद, निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव सुधासागरजी महाराज के सानिध्य व प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया सुयश अशोक नगर के दिशा निर्देशन में मंदिर बनने जा रहा है ।वास्तुविद श्रीपाल जैन व प्रवक्ता सुरेश गांधी ने बताया कि सागर में मुर्ति का प्रथम तिलक दान दस्तुुर करने का सोभाग्य मुर्ति पूण्यार्जक परिवार प्रदीप पिण्डारमिया पुत्र रतनलाल पिण्डारमिया परिवार की वर्षा पिण्डारमिया को ध मिला । सागर के भाग्योदय तीर्थ पर सुखोदय के भगवान का तिलक दन हो रहा था और नौगामा जैन समाज के घर घर में दीप जल रहे थे ।राजस्थान के सबसे बडे भगवान की मूर्ति का तिलकदान और भगवान 20वें तीर्थंकर मुनिसुव्रतनाथ भगवान की सगाई का दस्तुर —— सागर के भाग्योदय तीर्थ पर निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव सुधासागरजी महाराज के सानिध्य में  किया गया । इस दौरान मुनि श्री ने कहा कि राजस्थान के सबसे बडे मुनिसुव्रतनाथ भगवान की वागड ही नही पुरे भारत के भगवान की आज सगाई का दस्तुर हुआ है ।मुर्ति जब सुखोदय तीर्थ पर पहुंच जाए तो सगाई के रूप में सभी एक एक नारीयल ले जाकर बधेर कर नारियल का पानी मुर्ति पर डालकर शगुन के रूप में नारियल घर ले जाए तथा यह शगुन का श्रीफल है जो अपने छोटे बच्चों के लिए परिवार के सभी सदस्यों के लिए अपने घर ले जाएक्योंकि जिनेन्द्र भगवान को सारे भारत के शगुन का श्रीफल है । स्वाहा करके श्रीफल नही बधेरना है यह तो शगुन का श्रीफल है । मुनि श्री ने कहा कि पहली बार वागड के सबसे बडे भगवान का आगमन हो रहा है तो खाली हाथ मुंह दिखाई मत करना कुछ न कुछ शगुन के रूप में चढाना तब भगवान को देखना । क्युकि यह मुर्ति का जो भी दर्शन करेगा दिन दुगुना रात चौगुनी प्राप्त होगी । उन्होंने नौगामा जैन समाज के प्रतिनिधि मंडल से कहा कि सागर से नौगामा मुर्ति पहुचेंगी जब तक मार्ग में जितने भी नगर आते है वहां पर श्रद्धालुओं को तिलक दान करने का अवसर देना । मुर्ति सुखोदय तीर्थ के कमलासन पर बैठेगी नही तब तक तिलक दान होता रहेगा ।अतिशयकारी प्रतिमा जो की जयपुर नगर में बनने के बाद सागर में विहार हुआ । आज मुनि श्री ने कहा कि काले पाषाण की विशाल प्रतिमा जो कि अभी प्रतिष्ठित नहीं हुई है परंतु उस पाषाण में बहुत एनर्जी है जैसे ही यह प्रतिमा नौगामा नगर में पहुंचेगी संपूर्ण वागड में खुशहाली होगी ।नौगामा वासियों ने किया दीपदान नगर के 51 नवयुवक मंडल सदस्यों ने नवयुवक मंडल अध्यक्ष मुकेश गांधी के सानिध्य में दीपदान किया । मुर्ति के आसपास श्रीफल फोड़कर उसका शुद्ध जल प्रतिमा पर डाला गया गया । पुज्य सुधासागरजी महाराज व उपस्थित सभी संघ द्वारा अपना आशीर्वाद प्रदान किया गया । आशीर्वाद के पश्चात भगवान श्री के जय कारों के साथ प्रतिमा का मंगल विहार नौगामा नगर की ओर हुआ ।प्रवक्ता ने बताया कि 25 टन वजनी प्रतिमा काले पाषाण की मुर्ति जो कि 12 फीट चोडाई, उंचाई सवा 15 फीट तथा गहराई 6 फीट पद्मासन आकार में बनी हुई है प्रतिमा 22 टन पत्थर से बने कमल के फूल पर विराजमान होगी। जिसका 22 को वागड में भव्य आगमन होगा ।सुरेशचंद गांधी नौगामा से प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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