मुनि श्री विमल सागर महाराज सानिध्य में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के अवतरण दिवस पर उनके जीवन कृतित्व पर प्रकाश डाला गया आचार्य श्री वृत्ति धारक थे विमल सागर महाराज
खिमलासा
पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मुनि श्री विमल सागरमहाराज, मुनि श्री अनंत सागर महाराज, मुनि श्री धर्म सागर महाराज एवं मुनि श्री भावसागर महाराज सानिध्य में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का अवतरण दिवस मनाया गया। इस अवसर पर श्री जी का अभिषेक, विशिष्ट मंत्रों के साथ शांति धारा एवं पूजन संपन्न की गई।
गुरु गुणगान महोत्सव के अंतर्गत सर्वप्रथम मंगलाचरण चित्र अनावरण दीप प्रज्वलन के बाद मुनि संघ का पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेट किया गया। एवं दीक्षित मुनिराजो का दीक्षा दिवस मनाया गया। आयोजन के क्रम में विद्योदय दिव्य घोष के सदस्यों ने अपने घोष के माध्यम से मंगल ध्वनियों की प्रस्तुति दी।
इसी क्रम में पूज्य मुनि श्री विमल सागर महाराज ने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज वृति धारक थे। दूर से देखकर हम भूल जाते थे, जब मुनि समय सागर आ रहे होते थे, तो हम आचार्य विद्यासागर समझते थे। हमें महान आचार्य मिले हैं उनका गुणगान हमेशा करते रहना चाहिए।

इस अवसर पर मुनि श्री अनंत सागर महाराज ने कहा कि गुरु कृपा से लोगों ने व्यसन छोड़ दिए। आचार्य श्री हर उत्तर देने में माहिर थे, वह शब्दों के जादूगर थे, शब्दों के बादशाह थे। इस अवसर पर मुनि श्री भावसागर महाराज ने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने ऐतिहासिक काम तो किया ही है। आचार्य समय सागर महाराज पूर्व अवस्था में समाधि स्थ आचार्य विद्यासागर महाराज, निर्यापक मुनि श्री योग सागर महाराज, मुनि श्री उत्कृष्ट सागर महाराज चारों गृहस्थ जीवन के सगे भाई हैं। उनके गृहस्थ जीवन के माता-पिता भी आचार्य धर्म सागर महाराज से दीक्षित हुए थे।
उन्होंने कहा कि आचार्य श्री के सानिध्य में अनेक पंचकल्याणक महोत्सव, महाविधान, मंदिर शिलान्यास, वेदी प्रतिष्ठा आदि प्रभावित कार्य संपन्न हुए हैं। उन्होंने 40000 किलोमीटर से भी ज्यादा पदयात्रा की है। 1976 में उन्होंने मीठे का त्याग किया। उनके सूत्र में जिंदगी बहुत छोटी है। उसकी कद्र करो, और नेक राह पर चलकर सार्थक बनाओ। वह सरल, सहज, प्रसन्न व्यक्तित्व के धनी है। उनके अंदर हित मित प्रियता के दर्शन होते थे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
