हथकरघा वस्त्र कला अहिंसा का परिचायक है शांति सागर महाराज हथकरघा कल को प्रेरणा देकर अहिंसा को प्रोत्साहन देते थे सुप्रभ सागर महाराज
नीमच
चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर महाराज के आचार्य पद प्रतिष्ठापन शताब्दी वर्ष के उपलक्ष में हो रहे आयोजन के अंतर्गत परम पूज्य मुनि श्री 108 सुप्रभ सागर महाराज ने आचार्य शांति सागर महाराज की जीवन कृतित्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि हथकरघा वस्त्र कला अहिंसा का परिचायक है शांति सागर महाराज हथकरघा कला को प्रेरणा देकर अहिंसा को प्रोत्साहन देते थे। खादी वस्त्र का अधिक से अधिक उपयोग से जीव दया का पालन होता है। आचार्य श्री शांति सागर जी अहिंसा का पालन करने के लिए प्रोत्साहन में भी सहयोग के लिए प्रेरणा देते थे।

बुधवार की बेला में आचार्य शांति सागर महामंडल विधान एवं परिचर्चा में मुनि श्री ने कहा कि आचार्य श्री शांति सागर जी ने श्रवणबेलगोला कर्नाटक में साधुओं को प्रोत्साहन के लिए अनेक प्रयास किए थे। यही कारण है कि 1994 में 100 साधु, 2006 में 200 साधु, 2018 में 350 मुनि संत है। 2030 में 500 से ऊपर होने का लक्ष्य है।
इस अवसर पर मुनि श्री वैराग्य सागर महाराज ने कहा की गुरु की आशीर्वाद से व्यक्ति जीवन के हर क्षेत्र में प्रगति करता है। गुरु जी के मार्गदर्शन में ही शांति सागर जी महाराज ने अहिंसा के अनेक सेवा प्रकल्पों को एवं उनका करने वालों को प्रेरणा प्रदान की।
देव गुरु और साधु की भक्ति करें तो हमारा जीवन भी उसी प्रकार आगे बढ़ेगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
