प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज का आचार्य पद शताब्दी महोत्सव का शुभारंभ तीन दिवसीय कार्यक्रम अंतर्गत हुआ।पारसोला पंचम पट्टाघीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की मंगल भावना एवं प्रेरणा अनुसार केन्द्रीय चारित्र चक्रवर्ती आचार्य 108 श्री शांतिसागर जी महाराज केआचार्य पद प्रतिष्ठापन शताब्दी महोत्सव समिति ने इसकी घोषणा त्रिदिवसीय कार्यक्रम के समापन अवसर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सानिध्य में पारसोला में की। आचार्य श्री शांति सागर जी का जन्म सन 1872 संवत 1929 में हुआ आप का जन्म भोज के पास येलगुल में हुआ ।श्रीमती सत्यवती भीमगोडा पाटिल के पुत्र सातगौड़ा ने क्षुल्लक दीक्षा सन 1915 में तथा मुनि दीक्षा सन 1920 में ली आपको आचार्य पद सन 1924 समडोली में दिया गया। 41 वर्ष के संयमी जीवन में 5 से अधिक बार सर्प के उपसर्ग, सिंह के उपसर्ग, चींटी मकोड़े आदि के उपसर्ग आपने समता भाव से सहन किया। आपने अपने जीवन में 9938 उपवास किये णमोकार मंत्र के 18 करोड़ जाप आपने किये आपने जैन धर्म के संस्कृति, जैन मंदिर और जिनवाणी के संरक्षण के लिए अनुकरणीय कार्य किया। अपने 88 भव्य जीवो को जेनेश्वरी दीक्षा प्रदान की।झलकियां 13 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक आचार्य पद शताब्दी महोत्सव मनाया गया। राजेश पंचोलिया अनुसार उल्लेखनीय हैं कि आचार्य श्री शान्तिसागर सागर जी सन् 1933 ब्यावर चातुर्मास के बाद पारसोला आयें तथा दो दिनों तक पारसोला में आपका प्रवास मिला।पारसोला नगर में 40 से अधिक धार्मिक संगठन है जिन्होंने पूरे समर्पण संस्था भाव से तन मन धन से कार्यक्रम में सहयोग किया नगर में जहां अंग्रेजी वेशभूषा के कोट पैंट जैकेट की वेशभूषा धार्मिक संगठन की रही, वहीं भारतीय परिधान धोती कुर्ता भी युवा मंडल की ड्रेस कोड रही। नगर में अनेक भवनों पर आचार्य श्री के भक्तों ने वात्सल्य वारिघि विला अंकित कर रखे हैं । नगर के जैन समाज के सभी प्रतिष्ठान तीन दिन पूर्णतया बंद रहे नगर में 5 से अधिक जिनालय हैं नगर से 10 से अधिक साधुओं ने जेनेश्वरी दीक्षा ग्रहण की ।आचार्य श्री वर्धमान सागर के प्रथम मुनी शिष्य ओम सागर जी महाराज इसी धरती के गौरव है। तीन दिवसीय कार्यक्रम में एक लाख से अधिक व्यक्तियों ने सहभागिता की। राजस्थान के साथ मध्य प्रदेश ,महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु,छत्तीसगढ़ गुजरात ,दिल्ली, पश्चिम बंगाल सहित अनेक राज्यों के आचार्य भक्त कार्यक्रम में उपस्थित हुए। इन तीन दिनों में इंद्र देवता ने रिमझिम वर्षा कर भूमि की शुद्धि की आचार्य श्री शांति सागर जी आचार्य वर्धमान सागर जी के तप संयम का प्रभाव था कि नगर से दूर अन्य शहरों में तेज वर्षा हुई किंतु नगर में पानी नहीं गिरा। तीन दिवसीय
कार्यक्रम में आचार्य शांति सागर जी के जन्म नगरी भोज से ग्रहस्थ अवस्था के परिजन पर पहुंचे , वहीं बेलगाम के क्षेत्रीय विधायक अभय पाटिल भी सैकड़ो समाजजनों के साथ कार्यक्रम में उपस्थित हुए। राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्तजानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी9929747312
