भूमि और भाग्य का एक ही स्वभाव है..जो बोओगे, वो ही पाओगे ..अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी
कुलचाराम हैदराबाद
अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि अपना समय पागलपन में नहीं, अब तो परम हंस बनने में लगाओ, क्योंकि आज के रिश्ते और रिश्तेदार स्वार्थ और पैसों से चल रहे हैं*। सबसे ज्यादा समझदार कहलाने वाला इंसान, सबसे ज्यादा दुखी और परेशान मिलेगा।
महाराज श्री ने कहा जिनको हम नादान, ना-समझ जानवर कहते हैं, वो हमें सुखी दिख रहे हैं वनस्पत इंसान की अपेक्षा। इंसान को जो स्कूल, कॉलेज, शिक्षक, मन्दिर, मस्जिद, गिरजा, धर्म और धर्म गुरू नहीं सिखा पाये, वो पशु, पक्षी, जानवरों से सीखें तो बहुत कुछ सीख सकता है।
उदाहरण के माध्यम से कहा कि जैसे वो रात को कुछ नहीं खाते। रात को घूमते नहीं।अपने बच्चों को वो खुद ट्रेनिंग देते हैं। दूसरों के पास नहीं भेजते।वो ठूस ठूस के नहीं खाते।थोड़ा सा खाके उड़ जायेंगे, पर साथ लेके नहीं जायेंगे।समय से सोते हैं और सुबह ब्रह्ममुहूर्त में गाते गुनगुनाते उठ जायेंगे।अपना भोजन कभी नहीं बदलते।
अपने कुल, वंश में ही शादी करेंगे। दूसरी बिरादरी में नहीं। काग और हंस की जोड़ी कभी नहीं देखोगे।अपने शरीर से सतत् काम लेंगे। रात के अलावा विश्राम नहीं करते। बीमार
होने पर भोजन छोड़ देते हैं। जब स्वस्थ होंगे तभी खायेंगे।अपने बच्चों से खूब प्यार करते हैं। नौकरों के सहारे नहीं छोड़ते।आपस में मिल जुलकर ही रहते हैं। लड़ने, झगड़ने पर फिर एक हो जाते हैं। महाराज श्री ने बताया कि प्रकृति के सभी नियमों का पालन करते हैं।अपना घर इको फ्रेंडली बनायेंगे।
महाराज श्री ने प्रश्नवाचक लगाते हुए कहा किआप सोचो समझदार कोन –???* इसलिए –भूमि और भाग्य का एक ही स्वभाव है..
जो बोओगे, वो ही पाओगे…!!!*। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
