अनियत विहारी पूज्य गुरुदेव

धर्म

अनियत विहारी पूज्य गुरुदेव

कुण्डलपुर

जिनकी तप साधना त्याग की महिमा का वर्णन शब्दों की पारिधि को असीमित कर देता है उनका कोई भी कार्य नियोजित नहीं होता स्वयम नियोजित होता चला जाता है वह बिना तिथि के आते है आगमन करते है वह अतिथि शब्द को चारितार्थ करते है वह अनियत विहारी है एसा ही उन्होने आज किया आज बिना किसी के संकेत एक महामहोत्सव कुण्डलपुर को सम्पन्न कर मंगल विहार किया इतनी उम्र के बाद भी इनकी साधना निर्मोहिता एक ईश्वरीय रूप को परिलक्षित करते है सभी जानते है गुरुदेव व बडे बाबा की असीम अनुकम्पा कुंडलपुर महांमहोत्सव तय समय पर हो गया और आज देश महामारी से मुक्त है हमे गदगद होना चाहिए हम इसे महासंत के काल मे अवतरित हुए

राजस्थान को लगी है आस

गुरु की महिमा गुरु जाने कोई न जाने क्या मन मे लेकिन वह धरा राजस्थान जहा गुरुदेव दीक्षित हुए हम वह धरा आस लगाए है आपके चरण राजस्थान की माटी की और बडे

पावन होगा आपका आगमन

गुरुदेव आ जाओ राजस्थान

जहा हुआ आपका मगलाचरण

पावन होगा कण कण

गुरुदेव अब तो आओ राजस्थान

अब तक तो तरसाया अब न तरसाओ और

चरण आपके पडे गुरुवर राजस्थान की और

राजस्थान वालो की यह पुकार

राजस्थान आगमन अबकी बार

अभिषेक जैन लूहाडीया रामगंजमंडी

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