16 पहाड़ों से घिरी नगरी पारसोला का पुण्य प्रबल है

धर्म

16 पहाड़ों से घिरी नगरी पारसोला का पुण्य प्रबल है जहां पर प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज का आचार्य पद प्रतिष्ठापना शताब्दी महोत्सव उनकी परंपरा के पंचम पट्टाघीश वात्सलय वारिघि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सानिध्य में पारसोला जैन समाज और वर्षायोग समिति द्वारा आगामी माह में राष्ट्रीय स्तर का 13 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तीन दिवसीय कार्यक्रम मनाया जावेगा। श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, श्री पदम प्रभु, श्री महावीर स्वामी, श्री शांतिनाथ, श्री पारसनाथ समवशरण मंदिर से सज्जित पारसोला नगर से अनेक भव्य आत्माओं ने श्रमण दीक्षा अंगीकार की है ।इस नगरी का यह गौरवशाली इतिहास है कि यहां आचार्य श्री वर्धमान सागर जी को सन 1990 में आचार्य पद प्राप्त हुआ ।उसके बाद आचार्य श्री ने अपने प्रथम मुनि शिष्य श्री ओम सागर जी तथा प्रथम आर्यिका श्री वैराग्य मति जी को इसी पावन धरा पारसोला में भव्य दीक्षा दी। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सहित 50 से अधिक साधुओं की पावन उपस्थिति में तीन दिवसीय कार्यक्रम अंतर्गत प्रतिष्ठाचार्य श्री हंसमुख जी शास्त्री के निर्देशन में दिनांक 13 अक्टूबर को प्रातः शोभा यात्रा ,घटयात्रा भूमि शुद्धि ,ध्वजारोहण ,मंडप उद्घाटन तथा आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की प्रतिमा का अनावरण और लोकार्पण पुण्यार्जक परिवार द्वारा किया जाएगा। पूर्वाचार्यों के चित्र का अनावरण दीप प्रज्वलन तथा मंगल कलश की स्थापना पश्चात आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के प्रवचन के पूर्व आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की जावेगी। दोपहर को आचार्य शांति सागर जी की प्रतिमा का पंचामृत अभिषेक तथा 108 द्रव्यों से महा अर्चना और आचार्य शांति सागर विधान की पूजन शताधिक इंद्रो द्वारा की जावेगी। विनयाजली के बाद रात्रि को श्री जी की आरती के बाद बड़वाह के संजय महाजन पार्टी के द्वारा आचार्य शांति सागर गौरव गाथा का मंचन किया जावेगा।
दिनांक 14 अक्टूबर को प्रातः श्रुत प्रभावना जिनवाणी का जुलूस श्रीजी का पंचामृत अभिषेक, शांति धारा के पश्चात श्रुत अलंकरण समारोह होगा जिसमें ग्रीष्मा जैन इंदौर के द्वारा नृत्य की प्रस्तुति के साथ स्कंध जिनवाणी की पूजन की जावेगी। आचार्य श्री के प्रवचन विनयांजलि सभा के पश्चात दोपहर को जिनवाणी 100 विभिन्न मंदिरों में 100 शास्त्र भेंट किए जाएंगे ।विनयांजलि सभा और सम्मान सभा आयोजित होगी। रात्रि में श्रीजी की आरती के बाद रूपेश जैन इंदौर के द्वारा सांस्कृतिक भजन संध्या का आयोजन होगा।दिनांक 15 अक्टूबर को श्री जी के अभिषेक के पश्चात विनयाजली सभा और आचार्य श्री के प्रवचन होंगे दक्षिण भारत से पधारे समस्त भट्टारक स्वामी जी का सम्मेलन और बहुमान किया जाएगा। दोपहर को तीन दिवसीय कार्यक्रम का समापन कर सम्मान सभा आयोजित की जावेगी।
राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *