कवियत्री अनामिका अंबर पहुंची गुरु विमर्श के चरणों में लिया आशीष गुरुदेव मुझे ऐसा आशीष दीजिए की मैं सच बोलने से कभी पीछे ना हटू अंबर
दिल्ली
प्रख्यात कवियत्री डॉ अनामिका अंबर ने दिल्ली स्थित कृष्णा नगर दिगंबर जैन मंदिर में विराजित आचार्य श्री विमर्श सागर महाराज का आशीष लिया।
इस अवसर पर उनका अभिनंदन भी किया गया उनके बोलते ही वातावरण में एक नया उल्लास दिखने लगा।
इस अवसर पर उन्होंने काव्य रचनाओं को सुनाया उनकी एक रचना शाकाहार को प्रेरित करने के लिए थी जिसमें उन्होंने कटाक्ष करते हुए सुनाया बली जो मांगते हैं फिर उन्हें भगवान क्या कहना पशु हत्या के वर्णन को धर्म का मान क्या कहना। इन्हे जंगल में छोड़ो यह हमारे बीच क्यों रहते हैं।
गुरु जी के प्रति भाव प्रकट करते हुए कहा कि इंसानियत जगाई तुमने संविधान में अवतार महावीर के हो वर्तमान में उन्होंने अपनी चिर परिचित अंदाज में जोशीले सर में जो काव्य रचना दी वह सभी को मंत्र मुग्ध कर गई।
जैसे ही उन्होंने काव्य रचना प्रकट करते हुए काव्य रचना को पढ़ा
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संयम का दीप जलाकर आत्म को उजियार किया है,
कोई नहीं तुमसे दूजा यह सब ने स्वीकार किया है इस रचना को पढ़ते ही सभी की और से तालियों की गड़गड़ाहट होने लगी। हाथों में तुम राज भगवान मिला है सभी की ओर से और तालियां बजने लगी। उन्होंने गुरु वंदना करते हुए कहा कि लिखा इतिहास में ऐसा गुरु भगवान से बढ़कर होते। कटाक्ष करते हुए कहा कि गुरु निंदा जो करते हैं कभी वह घर नहीं पाते। उन्होंने यह भी कहा कि गुरुदेव मुझे ऐसा आशीष दीजिए की मैं सच बोलने से कभी पीछे ना हटू।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312






