यदि जिज्ञासा समाधान रोक देता तो भाग्योदय तीर्थ में अफरा तफरी मच जाती मुनि श्री सुधा सागर महाराज
सागर
यह सब भली भाती जानते हैं कि भाग्योदय तीर्थ परिसर में एक बहुत बड़ा हादसा टल गया हालांकि यह पुण्य प्रताप कहे या गुरुदेव का पावन सानिध्य कहे।
यदि हम गौर करे तो कोई अतिरोक्ति नहीं आएगी की पूज्य गुरुदेव विद्यासागर महाराज के चरण जहां-जहां पड़े हैं वह धरा तो वैसे ही पुण्य की पावन धरा हो जाती है। फिर महासागर के सागर विद्यासागर से उपजे मोती पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधा सागर महाराज भाग्योदय तीर्थ पर विराजमान है। तो फिर क्या अनहोनी हो सकती है।








ऐसा ही विगत 23 सितंबर की शाम को हुआ एक भीषण हादसा होने से टल गया यह गुरुदेव की दूरदर्शिता थी कि उन्होंने अफरा तफरी नहीं होने दी और सभी ने एकांत चित्त होकर जिज्ञासा समाधान को सुना उनके नाम में ही यदि सीधा पड़े तो उनका नाम है सुधा और हम इसके विपरीत करके देखें तो नाम हो जाता है धांसू यानी कि सुधा की अमृतवाणी संपूर्ण विश्व में जैन धर्म की ध्वजा को लहरा रही है।
वचन सिद्धि एवं निर्णय क्षमता के और साधना की प्रतिमूर्ति गुरुदेव का प्रताप अपने आप में सभी के सामने परिलक्षित है। एक दिन बीत जाने के बाद 24 सितंबर के जिज्ञासा समाधान में आचार्य श्री ने हादसे के विषय में कहा कि भाग्योदय के मेडिकल स्टोर में लगी आग के समय यदि में जिज्ञासा समाधान कार्यक्रम रोक देता तो भाग्योदय परिसर में अफरा तफरा मच जाती। यही कारण था की जिज्ञासा समाधान जारी रखा था। इसमें अच्छा यह हुआ कि किसी भी तरह की जनहानि नहीं हुई।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
