इंसान उन चीजों से कम बीमार पड़ता है, जो वो खाता है..बल्कि ज्यादा बीमार वो उन चीजों से हो रहा है, जो उसे अन्दर ही अन्दर खा रही होती है..! अंतरमना प्रसन्नसागर महाराज

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इंसान उन चीजों से कम बीमार पड़ता है, जो वो खाता है..बल्कि ज्यादा बीमार वो उन चीजों से हो रहा है, जो उसे अन्दर ही अन्दर खा रही होती है..! अंतरमना प्रसन्नसागर महाराज
कुलचाराम हैदराबाद
अन्तर्मना आचार्य प्रसन्नसागर महाराज ने कहा की इंसान उन चीजों से कम बीमार पड़ता है, जो वो खाता है..बल्कि ज्यादा बीमार वो उन चीजों से हो रहा है, जो उसे अन्दर ही अन्दर खा रही होती है..!

 

 

महाराज श्री ने यथार्थ सत्य को परिलक्षित करते हुए कहा कि अब देश में भ्रष्टाचार और मिलावट इतनी अधिक बढ़ गई है कि अब मरने के लिए शुद्ध जहर नहीं मिलता और जीने के लिए शुद्ध भोजन नहीं मिलता। उन्होंने आगे कहा कि देश में मिलावट का दौर जोरों पर है। आज मिलावट का जमाना है, बाजार में मिलावट का कार्य जोरों पर है।

 

एक व्यक्ति अपने घर में कीड़े मारने की दवा लाया, दूसरे दिन जब उसने दवा को देखा तो उस दवा में ही कीड़े पड़ गए थे। अब इससे बड़ा भ्रष्टाचार और क्या हो सकता है-? कीड़े मारने की दवा में ही कीड़े पड़ जाए तो फिर और क्या कहना। सब जगह मिलावट है।

 

पहले तो लोग दूध में पानी मिलाते थे, लेकिन अब लगता है कि पानी में दूध मिलाया जा रहा है। हर चीज में मिलावट है, खाने पीने से लेकर औषधियों में भी मिलावट है। इतना ही नहीं विचारों और आदर्शों में भी मिलावट जारी है। आदमी बोलता कुछ है, सोचता कुछ है। दिखाता कुछ है, और देता कुछ और है।*

 

बाजार में सब नकली सिक्के चल रहे हैं। कहते हैं ना -खराब मुद्रा, अच्छी मुद्रा को चलन से बाहर कर देती है…!!!*। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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