हमें अपने अंदर दिव्यता को लाने के लिए ईर्ष्या को छोड़ना होगा आदित्य सागर महाराज
बूंदी
परम पूज्य मुनिश्री 108 आदित्य सागर महाराज ने श्री शीतलनाथ दिगंबर जैन मंदिर नैनवा रोड पर अपने उद्बोधन में कहा कि हमें अपने अंदर दिव्यता लाने के लिए ईर्ष्या को छोड़ना होगा। हर परिस्थिति में स्वयं को निर्मल करना होगा। तभी आपका जीवन सफल हो सकता है।
महाराज श्री ने आगे कहा कि सकारात्मक की ओर बढ़ने से आप उन्नति की ओर अग्रसर होंगे। प्रभु श्री राम का उदाहरण देते हुए महाराज श्री ने कहा कि भगवान श्री राम दिव्य पुरुष के रूप में अत्यधिक निर्मल थे और हमेशा पॉजिटिव सोच रखते थे।





रावण तो पंडित ज्ञानी और महायोद्धा था, लेकिन श्री राम ने सकारात्मक सोच के साथ उसको परास्त कर दिया।
उन्होंने कहा आज के भागम भाग वाले युग में हम अपने बच्चों पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। पहले संयुक्त परिवार होते थे, और बच्चों को बड़ों का सानिध्य मिलता था। लेकिन अब संयुक्त परिवार कम होते जा रहे हैं। यही कारण है कि बच्चों में संस्कारों की कमी है। बच्चों की शिक्षा भले ही स्कूलों में होती है, लेकिन उसके माता-पिता उसके पहले गुरु होते हैं। अब यह हमें तय करना है कि बच्चों को संस्कार बनाना है या फिर उनको रास्ता भटकने के लिए छोड़ना है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
