माँ इसलिए महान होती है क्योंकि वह झूठ बोलना जानती है, सुधासागर महाराज योग दिवस की तरह क्षमा दिवस को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिले विधायक शैलेंद्र जैन

धर्म

माँ इसलिए महान होती है क्योंकि वह झूठ बोलना जानती है, सुधासागर महाराज योग दिवस की तरह क्षमा दिवस को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिले विधायक शैलेंद्र जैन
सागर
भाग्योदय तीर्थ परिसर में पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव 108 सुधा सागर महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि माँ इसलिए महान होती है, क्योंकि वह झूठ बोलना जानती है, झूठ दो प्रकार के होते हैं- एक दूसरे के विनाश के लिए, दूसरे के गुणों को छुपाने के लिए, दूसरे की अवमानना के लिए झूठ बोला जाता है, वह झूठ पाप कहलाता है। एक झूठ विकास के लिए, उत्थान के लिए, हित के लिए बोला जाता है, वह झूठ भी पुण्य है और धर्म कहलाता है। भक्ति वह नहीं है जो सत्य बोलता है, भक्ति वह है जो ऐसा झूठ बोलती है, जो सत्य से भी बड़ा होता है।

 

 

 

उन्होंने कहा किसी को दुआ देना, भक्ति करना है, प्रशंसा करना है, यदि तुम सही में गुणवान के प्रति अनुरागी हो तो उसके पास जितने गुण हैं उतना ही बखान मत करो, उसमें तुम जितने भी बड़ा-चढ़ाकर कह सको, कहना चाहिए। अपने आराध्य में, अपने इष्ट में, अपने प्रिय में थोड़ा सा भी गुण हो वहाँ सत्य मत बोलना। उसको जितने ज्यादा ऊंचाई पर तुम मान सको, जबकि वो है नीचे। यदि जितना वो है उतना ही बोलना तो तुम्हारी भक्ति क्या हुई, तुमने क्या दिया, तुम्हे पुण्यबन्ध क्यों होगा। मुनि को मुनि मानना यह भक्ति के अंतर्गत नही आएगा, ये सत्य की जानकारी है। इससे निर्जरा तो होगी लेकिन वो पुण्यबन्ध नहीं होगा, जो हमें चाहिए।

 

मंदिर कितने ही पवित्र रखना लेकिन आने वाले रास्ते यदि गंदे है तो वह मंदिर भी जरा देर पवित्र नहीं रह पाएगा। भगवान कितना भी निर्मल क्यों न हो लेकिन भक्त यदि गंदे हैं तो भगवान कोई

 

 

कार्यकारी नही होंगे। भगवान जो नहीं है, वह अपने बना दिया तो वहीं से आपको सातिशय पुण्य का बंध होता है। तुम अपने गुरु में क्या भावी पर्याय देख रहे हो, चलते फिरते सिद्ध समान, यहाँ से भक्ति शुरू होती है। भक्त जितना ऊँचा उठाएगा, उतना ही ऊंचा तुम्हें पुण्यबंध होगा और आराध्य अपने आप को जितना नीचे मानेगा, उतनी ही उसकी साधना पवित्र होगी। तुम झुको तो झुक जाना लेकिन तुम्हारे कारण भक्त को शर्मिंदा न होना पड़े।

तुमने क्या किया उसका महत्व नहीं है, तुम्हारे कारण से कितने लोगों को नीचा देखना पड़ा, सवाल उसका है। बेटों को जो करना है करो, कोई पाबंदी नहीं है बस तुम्हारे कारण से कहीं माँ-बाप को नीचा न देखना पड़े, ये है सबसे बड़ा पाप। पाप कोई पाप नही होता लेकिन तुमने ऐसा पाप किया जिसमें तुम्हारी जाति को, राष्ट्र को नीचा देखना पड़ा, जाओ अब तुम्हारे लिए हजारों हजारों भवों तक आर्यखण्ड नही मिलेगा। कुकर्म तुमने किया था और बदनाम देश हुआ था। जो करना है करो, बस तुम्हारे कारण कुल में कलंक न लग जाए, ऐसा कोई पाप मत करना जिससे पूर्वजों की इज्जत धूल में मिल जाए।

माँ-बाप कोई ऐसा कार्य न करें जिससे बेटे को स्कूल में शर्मिंदा होना पड़े। तुम कितने ही गंदे हो तुम्हारे कारण से रास्ता गंदा नहीं होना चाहिए, तुम्हारे कारण से धर्म मलिन नही होना चाहिए। एक ही झूठ है लेकिन मुनिराज बोल रहे हैं तो सीधा उस समय नरक गति का बंध होगा और वहीं झूठ बालक बोल रहा है तो कोई दुर्गति का बंध नहीं होगा, क्यों तुम्हारे झूठ बोलने से कितने लोगों का अहित होगा। छोटों को सोचना है कि कहीं हमारे कृत्य से बड़ों पर लांछन तो नहीं आएगा और बड़ों को सोचना है कि हमारे कुकृत्यों से छोटे तो शर्मिंदा नहीं होगे।

तुम गुटखा खाओगे, शराब पियोगे कोई बात नहीं पर गुटखा और शराब से मारोगे, पत्नी को विधवा होना पड़ेगा, यह विधवा करने का पाप अक्षम्य पाप है, तुम्हारे कारण उसने गुटखा खाया नहीं, वो धर्मात्मा है और तुम्हारे पाप से उसको विधवा होना पड़ा, दुनिया के दुःख उसको उठाना पड़े, पाप तुमने किया और भोगेगी पत्नी, इसलिए मैं कह रहा हूँ कि पाप नहीं छोड़ सकते हो तो कम से कम शादी मत करना, एक नारी को विधवा करके मत मारना, ये शराब से भी बड़ा पाप है। पाप का उतना बड़ा पाप नहीं है जितना बच्चे अनाथ हो जाएंगे। गुटखा खाने का पाप नहीं है, माँ को निपूती करने का पाप है। जो तुम्हारे दिए हुए कष्टों में नहीं रोई, वो तुम्हारे पापों के कारण रोना पड़ रहा है, इसलिए संबंधों को कलंकित मत होने देना, इनको पवित्र बनाकर रखे
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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