तपोभूमि प्रणेता आचार्यश्री प्रज्ञा सागर महाराज ने किया अनंत चतुर्दशी के पावन पर्व पर केशलोचन

धर्म

तपोभूमि प्रणेता आचार्यश्री प्रज्ञा सागर महाराज ने किया अनंत चतुर्दशी के पावन पर्व पर केशलोचन
झालरापाटन
परम पूज्य तपोभूमि प्रणेता आचार्य श्री 108 प्रज्ञा सागर महाराज के सानिध्य में 10 लक्षण पर्व उत्कृष्ट तप आराधना हुई। निश्चित रूप से यह गुरुदेव के सानिध्य का ही चमत्कार कहा जाएगा की उपवास करने वाले सभी युवा हैं और वह युवा जो आज धर्म से जुड़कर धर्म की ओर साधना कर रहे है, अपने आप में बेजोड़ है।

 

 

पर्व की बेला में 10 लक्षण पर्व के अंतिम दिन अनंत चतुर्दशी के दिन को गुरुदेव ने जिसे हम त्याग तपस्या के रूप में महत्वपूर्ण मानते हैं वैसे ही आज गुरुदेव ने त्याग तप करते हुए तपोभूमि प्रणेता आचार्य श्री 108 प्रज्ञा सागर महाराज ने केशलोचन किया। स्वयं के हाथों बिना किसी अस्त्र के अपने हाथों से घास फूस की तरह संत निकालते हैं जो अपने आप में एक उत्कृष्ट साधना होती है।

 

झालरापाटन में पूज्य गुरुदेव के केशलोचन हो रहे थे उनके साथ पूज्य मुनि श्री108 प्रिय तीर्थ महाराज, बाल ब्रह्मचारी संस्कार भैया बाल ब्रह्मचारी प्रवीण भैया सम्मिलित रहे। इन क्षणों को देखने काफी भक्त मौजूद रहे। आज गुरुदेव का उपवास रहेगा।

 

 

 

केशलोच
यदि इसके बारे में जाने तो यह करना कोई साधारण बात नहीं है, यह जैन संतों का सबसे कठोर तप माना गया है आम आदमी के जीवन में यदि एक बार गलती से बाल उखड़ जाए तो वह दर्द के मारे कांपने लगता है। लेकिन जैन संत तो बिना किसी औजार के सीधे अपने हाथों से बालों को खींचकर निकाल देते हैं। जैन संत सदा स्वावलंबी होते हैं, वे किसी को भी कष्ट न देते हुए स्वयं की साधना करते हैं। चाहे कैसा भी कष्ट क्यों ना हो। वे समभाव में उसे सहन करते हुए मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होते हैं। जैन संत अहिंसा व्रत के पालन के साथ ही शरीर से राग भाव को भी हटाते हैं।

 

साधु शरीर की सुंदरता को नष्ट करने के लिए अहिंसा धर्म का पालन करते हुए केशलोच करते है। जब जैन संत स्वयं के हाथों केशलोच करते है तो उनके चेहरे पर मुस्कुराहट देखने को मिलती है। जो अपने आप में पंचम युग में एक उत्कृष्ट साधना है

अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *